किसी आदमी के पास एक शानदार तोता था। उसने तोते को एक शब्द ‘बेशक’ बोलना सिखा दिया। फिर उसने गांव में कुछ स्थानों पर थोड़ा-थोड़ा धन गाड़ दिया। अगली सुबह वह तोते को लेकर गांव में निकला और लोगों से बोला कि उसका तोता बहुत बुद्धिमान है। वह बता सकता है कि जमीन में कहां धन गड़ा हुआ है। लोगों ने उसे परखना चाहा, तो वह तोते को उन्हीं जगहों पर ले गया, जहां पिछली रात उसने धन गाड़ दिया था। उसने बारी-बारी से तोते से उन जगहों के बारे में पूछा और तोते के 'बेशक' कहने के बाद वह उपस्थित लोगों के सामने गड्ढा खोदकर धन निकालने लगा।
भीड़ में एक युवक इस कारनामे को देखकर प्रभावित हो गया। वह सोचने लगा कि यदि तोता उसे मिल जाए, तो वह बहुत जल्द ही धनी हो जाएगा। युवक ने तोते के मालिक से पूछा, सौदा किया और तोता खरीद लिया। फिर उसने मालिक के तरीके से एक स्थान पर रुककर तोते से कई बार पूछा कि यदि मैं यहां खोदूं, तो क्या धन मिलेगा? हर बार तोते ने एक ही उत्तर दिया, बेशक! युवक ने कई जगह खोदकर देखा, पर उसे कहीं भी खजाना नहीं मिला।
युवक समझ गया कि उसे ठग लिया गया है। उसने तोते से पूछा, ओ ज्ञानी तोते, मुझे लगता है कि मैंने एक हजार सोने के सिक्कों के बदले में तुम्हें खरीदकर बहुत बड़ी मूर्खता कर दी है। तोते ने फिर वही रटा-रटाया उत्तर दिया, बेशक! यह सुनकर युवक को जोरों की हंसी आ गई और वह खुद का ठगा जाना भूल गया। हंसी थोड़ी रुकी, तो वह तोते से बोला, तुमने पहली बार सच कहा। अब मैं इन चक्करों में पड़कर अपना समय और धन नष्ट नहीं करूंगा। यह सुनकर तोते ने एक बार फिर 'बेशक' कहा। तोते ने दूसरी बार सच बोला था।