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स्त्रियों के बारे में यह बातें यकीनन आप नहीं जानते होंगे

Sat, 05 Mar 2016 07:18 PM IST
-संकलित
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म‌हिला
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जब विधाता स्त्री की रचना कर रहे थे, तो उन्हें काफी समय लगा। छह दिन हो गए और स्त्री की रचना अब भी अधूरी थी। देवदूत ने पूछा, आप इसमें इतना समय क्यों ले रहे हैं...? विधाता ने जवाब दिया, क्या तूने इसके सारे गुणधर्म देखे हैं, जो इसकी रचना के लिए जरूरी हैं?
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उत्तर आया, नहीं। विधाता सुनाने लगे, यह हर प्रकार की परिस्थितियों को संभाल सकती है। यह एक साथ अपने सभी बच्चों को खुश रख सकती है। यह अपने स्नेह से हर घाव भर सकती है। इसका सबसे बड़ा गुणधर्म यह है कि बीमार होने पर भी अपना ख्याल खुद रख सकती है एवं घर का काम भी कर सकती है।

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देवदूत ने आश्चर्य से पूछा, क्या यह सब दो हाथों से कर पाना संभव है? विधाता ने कहा, यही नहीं, और बहुत कुछ, जो मुझे भी पता नहीं है।

देवदूत ने नजदीक जाकर स्त्री को हाथ लगाया और कहा, विधाता यह तो बहुत नाजुक है। विधाता ने कहा, हां, यह नाजुक है, मगर इसे बहुत मजबूत और शक्तिसंपन्न बनाया गया है। इसमें हर परिस्थिति को संभालने की ताकत है।
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देवदूत ने पूछा, क्या यह सोच भी सकती है? विधाता ने कहा, यह सोच भी सकती है और मजबूत होकर मुकाबला भी कर सकती है। देवदूत ने स्त्री के गाल छूकर कहा, विधाता, यह तो गीला है। लगता है, इसमें से कुछ रिस रहा है। विधाता बोले, ये इसके आंसू हैं।

देवदूत ने पूछा, आंसू किसलिए? विधाता बोले, यह भी इसकी ताकत है। आंसू इसके फरियाद करने, प्यार जताने एवं अकेलापन दूर करने का तरीका है। देवदूत ने कहा, आपकी रचना अदभुत है। आप महान हैं।
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विधाता बोले- वह परिस्थितियों से समझौता करना भी जानती है। लेकिन यह अपना महत्व भूल जाती है।
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