इंद्र के सारथी मातलि अर्जुन को इंद्र की नगरी अमरावती ले गए। इंद्र ने अर्जुन के लिए उपयुक्त व्यवस्था कर दी। अर्जुन ने वहां देवताओं से दिव्य और अलौकिक अस्त्र-शस्त्र प्राप्त किए और उनके प्रयोग की विधि सीखी।
उन्हें चलाने का अभ्यास किया। उसके बाद उन्होंने वापस जाने की अनुमति मांगी, तो इंद्र ने कहा, वत्स! बेहतर होगा अगर तुम चित्रसेन गंधर्व से संगीत और नृत्य कला भी सीख लो। चित्रसेन ने इंद्र का आदेश पाकर अर्जुन को संगीत और नृत्य की कला में निपुण कर दिया।
जब चित्रसेन अर्जुन को संगीत और नृत्य की शिक्षा दे रहे थे, तब इंद्रलोक की अप्सरा उर्वशी भी शिक्षण और अभ्यास के दौरान वहां आती रहती थी। वह देखते-देखते अर्जुन पर मुग्ध हो गई। अवसर पाकर उर्वशी ने अर्जुन से कहा, हे अर्जुन! मैं आपको चाहने लगी हूं। मेरे साथ विहार करके मेरी वासना को शांत करें।