माघी पूर्णिमा के पावन अवसर पर मुजफ्फरपुर जिले के गंडक और बूढ़ी गंडक नदी के विभिन्न घाटों पर आस्था का जनसैलाब उमड़ पड़ा। श्रद्धालुओं ने पवित्र डुबकी लगाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य अर्पित किया और पुण्य लाभ अर्जित किया। इस दौरान घाटों पर ‘हर हर गंगे’ और ‘जय गंगा मइया’ के गगनभेदी जयकारे गूंजते रहे।
हजारों श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
माघी पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत शुभ तिथि मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन गंगा स्नान करने से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु गंगाजल में निवास करते हैं और इस दौरान गंगा स्नान करने से व्यक्ति को विशेष पुण्य प्राप्त होता है। इसी विश्वास के साथ श्रद्धालु तड़के सुबह से ही सीढ़ी घाट, अखाड़ा घाट, आश्रम घाट और संगम घाट पर पवित्र स्नान के लिए उमड़ पड़े। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने सूर्य देव को जल अर्पण किया और विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना की। इस दौरान विशेष रूप से जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने की भी परंपरा निभाई गई।
श्रद्धालुओं की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कसी कमर
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक सुरक्षा इंतजाम किए। एसडीओ (पूर्वी) अमित कुमार ने घाटों पर किसी भी तरह की अप्रिय घटना से बचने के लिए बूढ़ी गंडक नदी में निजी नावों के परिचालन पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया। इसके अलावा, एसडीआरएफ (स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स) की टीम को भी अलर्ट पर रखा गया।
प्रमुख घाटों पर पुलिस बल तैनात किया गया ताकि किसी भी स्थिति से निपटा जा सके। नगर निगम की ओर से घाटों की साफ-सफाई का विशेष प्रबंध किया गया था, जिससे श्रद्धालुओं को किसी तरह की असुविधा न हो।
वैशाली के कोनहारा घाट पर भी उमड़ी आस्था की भीड़
माघी पूर्णिमा के अवसर पर वैशाली जिले के प्रसिद्ध कोनहारा घाट पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। हाजीपुर और सोनपुर क्षेत्र से आए हजारों भक्तों ने यहां गंगा और गंडक नदी के संगम में स्नान कर सूर्य को जल अर्पित किया।
इस पावन अवसर पर सोनपुर के काली घाट, चेचर घाट, चकौशन, कुतुबपुर, बिदुपुर, जुड़वानपुर, नवानगर घाट और कष्टहरिया घाट पर भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचे। घाटों के किनारे विशेष पूजा-पाठ और भंडारों का आयोजन किया गया, जहां भक्तों को प्रसाद वितरण भी किया गया।
पूजन सामग्री की दुकानों पर दिखी रौनक
घाटों के पास स्थित बाजारों में भी माघी पूर्णिमा को लेकर खासा उत्साह देखा गया। श्रद्धालुओं ने पूजा-पाठ के लिए विशेष सामग्री खरीदी और घाटों पर विधिवत पूजा-अर्चना की। फूल, धूप, अगरबत्ती, दीपक और नारियल जैसी पूजा-सामग्रियों की दुकानों पर भीड़ उमड़ पड़ी।
आस्था और आध्यात्म का संगम बना माघी पूर्णिमा का पर्व
माघी पूर्णिमा का यह पर्व श्रद्धालुओं के लिए केवल स्नान और दान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मिक शुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का अवसर भी है। इस दिन श्रद्धालु न केवल अपने लिए बल्कि अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए भी पूजा-पाठ करते हैं।
मुजफ्फरपुर और वैशाली के विभिन्न घाटों पर उमड़े भक्तों की आस्था और श्रद्धा ने इस पर्व को और भी दिव्य बना दिया। पूर्णिमा के इस पावन दिन पर भक्तों की भक्ति, आध्यात्मिकता और सामाजिक समर्पण का अद्भुत संगम देखने को मिला।