महर्षि का महामंत्र
दुनिया भर में भावातीत ध्यान और योग के माध्यम से परचम लहराने वाले महर्षि महेश योगी ने जीवन को संतुलित करने वाली इस पारंपरिक विद्या से पश्चिम को तब परिचित कराया था, जब हिप्पियों का बोल-बाला हुआ करता था। महर्षि महेश योगी ने दुनिया को अनुभवातीत ध्यान से परिचित कराने के लिए 1951 में अमेरिका से विश्वयात्रा शुरू की। लेकिन जीवन को सुखद बनाने वाली यह विधा तब चर्चा में आई जब विश्व भर में धूम मचाने वाले संगीत बैंड बीटल्स भारत आया और उनसे मस्तिष्क को एकाग्र करने वाली तकनीक को सीखने के लिए ऋषिकेश स्थित ‘चौरासी आश्रम’ पहुंच गया।