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नवरात्रि 2018 : माता के इस शक्तिपीठ पर भक्तों से ज्यादा आते हैं चूहे

Sun, 14 Oct 2018 10:30 AM IST
मधुकर मिश्र
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karni mata
देश में कई ऐसे शक्ति के पीठ हैं जो अपने चमत्कार और अनूठी श्रद्धा और विश्वास के लिए जाने जाते हैं। इन्हीं में से एक है पर्यटकों को सबसे ज्यादा प्रिय माने जाने वाले राजस्थान राज्य के बीकानेर शहर में स्थित करणी माता का मंदिर।
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यहां चूहों को नहीं लगता डर
बीकानेर न सिर्फ मीठे रसगुल्लों और नमकीन-भुजियों के लिए जाना जाता है, बल्कि यह शहर देश-विदेश में चूहों वाले मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है। जहां विराजमान हैं मां करणी। शक्ति के प्रति हमारी आस्था और अटूट विश्वास से जुड़ा यह दिव्य धाम बीकानेर शहर से ३२ किलोमीटर दूर देशनोक गांव में स्थित है। माता करणी के इस शकितपीठ की बात करें तो यह विश्व की एकमात्र जगह है, जहां चूहे बड़ी आजादी के साथ सरपट दौड़ लगाते हैं और उन्हें कोई नुकसान नहीं पहुंचाता। बल्कि शुभ मानते हुए उन्हें पूजा जाता है।
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ऐसे लगता है माता के प्रसाद का भोग
करणी माता के इस मंदिर में टहलते चूहे ही माता के प्रसाद का भोग लगाते हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां कभी कोई बीमारी नहीं फैलती। माता के सेवक के रूप में पूजे जाने वाले इन चूहों को लोग काबा कहकर पुकारते हैं। काबों के साथ लोगों की श्रद्धा और लगाव इतना है कि लोग इनको खाने के लिए परात में मूंगफली और दूध आदि देते हैं। माता को चढ़ने वाले प्रसाद पर भी पहला अधिकार काबों यानी चूहों का होता है। जिनके खाने के लिए बकायादा बड़ी सी चांदी की परात भी है। अहम बात यह कि चूहों द्वारा प्रसाद को भोग लगाने के पश्चात ही उसे लोगों में वितरित किया जाता है।

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इस चूहे का दर्शन माना जाता है शुभ
करणी माता के मंदिर में मंदिर के भीतर टहल रहे तमाम चूहों में यदि आपको सफेद रंग का चूहा दिख जाए तो आप अपने आपको भाग्यशाली ही समझें। क्योंकि यहां पर लोगों की मान्यता है कि सफेद चूहे देखने वाले व्यक्ति पर माता अपनी अपार कृपा बरसाती हैं। यही कारण है कि इस सफेद चूहे के दर्शन के लिए यहां श्रद्धालु घंटों तक इंतजार करते हैं।
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इस अपराध के लिए चढ़ाना पड़ता है चांदी का चूहा
करणी माता के सेवक के रूप में पूजे जाने वाले इन चूहों को यहां कोई भूलकर भी नुकसान नहीं पहुंचाता है। यदि अनजाने में किसी से यह अपराध हो जाता है तो उसे माता को चांदी का चूहा चढ़ाकर अपने अपराध के लिए क्षमा मांगनी पड़ती है, तब कहीं जाकर वह इस अपराध से मुक्त हो पाता है।
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करणी माता - फोटो : file photo
माता ने चारण परिवार में लिया था जन्म
करणी माता के अवतरण के बारे में मान्यता है कि लगभग साढ़े छः सौ साल पहले माता ने एक चारण परिवार में बालिका रिद्धी बाई के रूप में जन्म लिया था। माता के मंदिर में पूजा अर्चना भी चारण लोगों द्वारा ही की जाती है। मान्यता है कि किसी भी चारण की मृत्यु के पश्चात उसका पुर्नजन्म काबा यानी चूहे के रूप में होता है। फिर बाद में वही काबा अपनी मृत्यु के बाद किसी चारण परिवार में जन्म लेता है। इसीलिए काबा को मंदिर के भीतर काफी आदर के साथ देखा जाता है।
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नवरात्रि में लगती है देश-विदेशी भक्तों की भीड़
करणी माता के मंदिर में साल में दो बार मेला लगता है। पहला चैत्र मास के नवरात्र के समय और दूसरा अश्विन मास के नवरात्रों में। यहां लोगों के द्वारा माता करणी के अनेकों चमत्कार सुनने को मिलते हैं। शायद यही कारण है कि देश-विदेश से बड़ी संख्या में भक्त अपने कल्याण की कामना लिए माता के दरबार में हाजिरी लगाने के लिए पहुंचता है और माता उस पर अपनी पूरी कृपा बरसाती हैं।
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