15 अगस्त दिन बुधवार को नाग पंचमी पर 20 साल बाद बेहद शुभ योग बन रहा है। अगर आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो ये उपाय करें, भगवान भोलेनाथ मेहरबान होंगे।
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शिव पूजा
नाग पंचमी का प्रारंभ तीन शुभ योगों के साथ कर्क लग्न में हो रहा है। शुभ योग और शुक्र कन्या राशि में नीच का होने से यह योग 20 वर्ष के बाद बन रहा है। यह कहना है सेक्टर-30 के श्री महाकाली मंदिर स्थित भृगु ज्योतिष केंद्र के प्रमुख बीरेंद्र नारायण मिश्र का।
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shiv puja
सूर्योदय सुबह पांच बजकर 53 पर है। कर्क लग्न सुबह छह बजकर तीन मिनट तक है। इसमें मंगल होने रुचक नाम का योग है। 15 अगस्त को सूर्योदय से सर्वार्थसिद्धि प्रारंभ होकर शाम चार बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगा। तीसरा रवियोग 15 अगस्त को शाम चार बजकर 13 मिनट पर प्रारंभ होगा, जो 16 अगस्त दिन में तीन बजकर 48 मिनट पर समाप्त होगा।
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Maha Shivratri
इस बार नाग पंचमी पर ये तीन योग एक साथ होने के कारण ‘अमृतमयी जयंती सिद्धि योग’ बन रहा है। बीरेंद्र नारायण मिश्र का कहना है कि पराशर स्मृति के अनुसार नागपंचमी मंगलवार की रात्रि को तीन बजकर 28 मिनट पर प्रारंभ होकर बुधवार की रात्रि एक बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी।
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Sawan Shivratri
देवालय पूजक परिषद के कोषाध्यक्ष और सेक्टर-18 के श्री राधा कृष्ण मंदिर के पुजारी डॉ. लाल बहादुर दुबे का कहना है कि जिसके कुंडली में किसी भी प्रकार का कालसर्प दोष हो तो नागपंचमी के दिन कालसर्प दोष की शांति करानी चाहिए। नाग पंचमी के दिन सर्पों के स्वामी वासुकी और तक्षक की पूजा होती है।
डॉ. लाल बहादुर दुबे ने बताया कि बुधवार को दोपहर 12 बजे से एक बजकर 30 मिनट तक है। राहु काल में ही कालसर्प दोष की पूजा करना चाहिए। यह सबसे उत्तम मुहूर्त है। बीरेंद्र नारायण मिश्र ने कहा कि ज्योतिष शास्त्र में राहु को सर्प माना गया है। जिसके कुंडली में राहु अशुभ है या राहु की महादशा या अंतर्दशा के कारण जीवन में कई प्रकार की परेशानियां है तो नागपंचमी के दिन शिव जी की पूजा अवश्य करनी चाहिए।