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Krishna Janmashtami 2025: क्यों लगाए जाते हैं श्रीकृष्ण को 56 भोग? जानिए जन्माष्टमी की खास मान्यता

Sun, 10 Aug 2025 10:57 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Krishna Bhog Significance: जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण को 56 भोग चढ़ाने की परंपरा पूरे देश में बड़े उत्साह से निभाई जाती है। यह संख्या 56 एक पौराणिक कथा से जुड़ी है, जिसमें गोवर्धन पर्वत उठाने के बाद गांव वासियों ने सात दिनों के लिए हर दिन आठ-आठ व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित किए थे। तभी से यह परंपरा चलती आ रही है।
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जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Janmashtami 56 bhog: जन्माष्टमी भारत के प्रमुख और सबसे आनंदमय त्योहारों में से एक है, जिसे पूरे देश में बड़े उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। इस दिन घरों और मंदिरों में भव्य सजावट होती है, भजन-कीर्तन गूंजते हैं और भक्तजन रात 12 बजे श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाते हैं। भगवान के स्वागत के लिए तरह-तरह की रस्में निभाई जाती हैं, जिनमें उनका श्रृंगार, झूला झुलाना और विशेष भोग अर्पित करना शामिल है।

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इन रस्मों में “56 भोग” की परंपरा सबसे खास और आकर्षक मानी जाती है। जन्माष्टमी के अवसर पर श्रीकृष्ण को 56 प्रकार के स्वादिष्ट व्यंजन अर्पित किए जाते हैं। लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि यह संख्या 56 ही क्यों तय हुई? न कम, न ज़्यादा इसके पीछे एक बेहद दिलचस्प पौराणिक कथा छिपी है, जो भक्ति, प्रेम और भगवान के चमत्कारों से जुड़ी हुई है।
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इंद्रदेव इस बात से क्रोधित हो गए और उन्होंने मूसलधार बारिश कर दी, जिससे पूरे ब्रज में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। - फोटो : instagram
पौराणिक कथा  
पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार ब्रजवासी इंद्रदेव की पूजा की तैयारी कर रहे थे ताकि अच्छी बारिश और भरपूर फसल मिल सके। बाल स्वरूप श्रीकृष्ण ने जब नंद बाबा से इसका कारण पूछा, तो उन्होंने बताया कि इंद्रदेव वर्षा के देवता हैं और उनकी पूजा से सुख-समृद्धि आती है। इस पर कृष्ण ने सभी से कहा कि असली आभार तो गोवर्धन पर्वत का होना चाहिए, क्योंकि वही फल, सब्जियां और पशुओं के लिए चारा देता है। उनकी बात मानकर ब्रजवासियों ने गोवर्धन पूजा की।
इंद्रदेव इस बात से क्रोधित हो गए और उन्होंने मूसलधार बारिश कर दी, जिससे पूरे ब्रज में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई। तब कृष्ण ने अपनी छोटी उंगली पर गोवर्धन पर्वत उठा लिया और सात दिन तक उसे थामे रखा, ताकि सभी लोग और पशु-पक्षी सुरक्षित रह सकें। सात दिन बाद जब बारिश थमी, तो सभी ने देखा कि कृष्ण ने इस दौरान कुछ भी नहीं खाया था। माता यशोदा जो दिन में आठ बार उन्हें भोजन कराती थीं, उन्होंने अपने लाडले के भूखे रहने पर प्रेम और भाव से सात दिन के भोजन को जोड़कर 56 प्रकार के व्यंजन बनाए और उन्हें भोग लगाया। तभी से जन्माष्टमी पर श्रीकृष्ण को 56 भोग अर्पित करने की यह परंपरा आज तक निभाई जा रही है।
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छप्पन भोग में तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान शामिल होते हैं, जिनमें मिठाई, नमकीन, मौसमी फल, अनाज, पेय और दूध से बने व्यंजन मुख्य होते हैं। - फोटो : instagram
छप्पन भोग में कौन से आहार शामिल 
छप्पन भोग में तरह-तरह के स्वादिष्ट पकवान शामिल होते हैं, जिनमें मिठाई, नमकीन, मौसमी फल, अनाज, पेय और दूध से बने व्यंजन मुख्य होते हैं। पारंपरिक तौर पर इसमें माखन, मिश्री, पेड़ा, लड्डू, रबड़ी, पूरी, कचौरी, हलवा, खिचड़ी, ताजे फल और ठंडे पेय जैसे कई लज़ीज़ पकवान अर्पित किए जाते हैं, जो श्रीकृष्ण के प्रिय माने जाते हैं।

छप्पन भोग में शामिल पारंपरिक 56 व्यंजन इस प्रकार हैं-
  • भात (चावल)
  • सूप (दाल)
  • प्रलेह (चटनी)
  • सदिका (कढ़ी)
  • दधिशाकजा (दही-शाक वाली कढ़ी)
  • सिखरिणी (सिखरन)
  • अवलेह (शरबत)
  • बालका (बाटी)
  • इक्षु खेरिणी (मुरब्बा)
  • त्रिकोण (मीठा)
  • बटक (बड़ा)
  • मधु शीर्षक (मठरी)
  • फेणिका (फेनी)
  • परिष्टश्च (पूरी)
  • शतपत्र (खजला)
  • सधिद्रक (घेवर)
  • चक्राम (मालपुआ)
  • चिल्डिका (चोला)
  • सुधाकुंडलिका (जलेबी)
  • धृतपूर (मेसू)
  • वायुपूर (रसगुल्ला)
  • चन्द्रकला (मीठा पकवान)
  • दधि (रायता)
  • स्थूली (थूली)
  • कर्पूरनाड़ी (लौंगपुरी)
  • खंड मंडल (खुरमा)
  • गोधूम (दलिया)
  • परिखा
  • सुफलाढया (सौंफ युक्त मिठाई)
  • दधिरूप (बिलसारू)
  • मोदक (लड्डू)
  • शाक (साग)
  • सौधान (अचार)
  • मंडका (मोठ)
  • पायस (खीर)
  • दधि (दही)
  • गोघृत (गाय का घी)
  • हैयंगपीनम (मक्खन)
  • मंडूरी (मलाई)
  • कूपिका (रबड़ी)
  • पर्पट (पापड़)
  • शक्तिका (सीरा)
  • लसिका (लस्सी)
  • सुवत
  • संघाय (मोहन)
  • सुफला (सुपारी)
  • सिता (इलायची)
  • मौसमी फल
  • तांबूल (पान)
  • मोहन भोग
  • लवण (नमक)
  • कषाय (कसैला स्वाद)
  • मधुर (मीठा)
  • तिक्त (कड़वा स्वाद)
  • कटु (तीखा स्वाद)
  • अम्ल (खट्टा स्वाद)


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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