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महर्षि पतंजलि ने योग को लेकर जो कहा था उसे जानना है बेहद जरूरी

Fri, 24 Jan 2020 03:07 PM IST
रुस्तम राणा स्वामी वेदांत भारती
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patanjali - फोटो : patanjali
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योग न तो आस्तिक है और न नास्तिक। यह एक विज्ञान है, जो ईश्वर के बारे में चुप ही रहता है। योग के प्रथम आचार्य पतंजलि ने ईश्वर का उल्लेख किया भी है, तो वे इतना ही कहते हैं कि ईश्वर के जरिए भी परम सत्य तक पहुंचा जा सकता है। विश्वास करना केवल एक उपाय है, क्योंकि इसी तरह प्रार्थना की जा सकती है और समर्पण संभव होता है। ईश्वर प्राणिधान है और विश्वास केवल एक मार्ग है। ईश्वर तक पहुंचने के और रास्ते भी हैं।

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पतंजलि कभी इनकार नहीं करते, कभी अनुमान नहीं लगाते। कठिन है यह समझना कि बुद्ध कैसे परम सत्य को प्राप्त कर सके। उन्होंने कभी ईश्वर में विश्वास नहीं किया। हिंदुओं के लिए यह विश्वास करना कठिन है कि महावीर मोक्ष प्राप्त कर सके, जबकि महावीर ने भी ईश्वर में विश्वास नहीं किया। पूर्वी धर्मों के प्रति सचेत होने से पहले, पश्चिमी विचारकों ने धर्म को हमेशा ईश्वर केंद्रित परिभाषित किया। 

जब वे पूर्वी विचारधारा के संपर्क में आए, तो उन्हें पता चला कि सत्य तक पहुंचने के लिए एक और मार्ग भी है, जो ईश्वर से रहित है। योग कहता है कि हम साधनों से बंधे नहीं हैं, साधन हजारों हैं। सत्य ही लक्ष्य है। उसे कइयों ने ईश्वर के द्वारा प्राप्त किया। यदि विश्वास नहीं करते तो भी ठीक है। अविश्वास के मार्ग की यात्रा करो और लक्ष्य तक पहुंचो। योग किसी तरह का धर्म नहीं है और आचार्य मार्ग दिखा रहे हैं, जो संभव हैं। वे दिखा रहे हैं सारे नियम, जो तुम्हारे लिए कार्य करते हैं। ईश्वर उन्हीं मार्गों में से एक है, लेकिन वह जरूरी नहीं है। यदि हम ईश्वर के बिना हों, तो अधार्मिक होना जरूरी नहीं है। हम भी पहुंच सकते हैं।

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