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विवाह पंचमी 2019: इसी तिथि पर हुआ था भगवान राम और माता सीता का विवाह

Sun, 01 Dec 2019 07:37 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
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राम सीता विवाह
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विवाह पंचमी की तिथि पर भगवान राम और माता सीता का विवाह हुआ था। मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर विवाह संपन्न हुआ था। इस बार विवाह पंचमी 1 दिसंबर को है। लेकिन भारत में कुछ जगहों पर खास तौर पर मिथिला क्षेत्र में विवाह पंचमी के दिन लोग अपनी कन्याओं का विवाह इस तिथि को नहीं करते है।आइए जानते हैं इसके पीछे की वजह।

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विवाह पंचमी पर कई जगह क्यों नहीं होते विवाह
भृगु संहिता में इस दिन को विवाह के लिए अबूझ मुहूर्त के रुप में बताया गया है। इसके बावजूद भी कुछ जगहों के लोग जैसे मिथिलावासी इस दिन अपनी बेटियों की शादी करना पसंद नहीं करते। इसके पीछे उनकी धारणा यह है कि इस दिन विवाह होने के कारण ही देवी सीता और भगवान राम को पूर्ण वैवाहिक जीवन का सुख नहीं मिला था। विवाह के बाद ही माता सीता को वनवास जाना पड़ा।

जब राम को राजा बनने का सौभाग्य मिलने वाला था तब देवी सीता को भगवान राम के संग वन में जाना पड़ा। जब वन से लौटकर राम अयोध्या के राजा बने तब राजधर्म निभाने के लिए राम को सीता से अलग होना पड़ा। देवी सीता मिथ्या कलंक के कारण वन में भेज दी गई।
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माता सीता गर्भवती अवस्था में भी जंगल में जाने को मजबूर होना पड़ा था। महर्षि वाल्मिकी के आश्रम में ही तमाम दुख:सुख सहते उनकी उम्र बीती। इसी कारण लोग सोचते हैं कि उनकी बेटियों को भी माता सीता की तरह कष्ट न उठाने पड़ें तो इस दिन विवाह नहीं करते। 

इस तिथि पर नहीं होता रामचरितमानस का पूरा आयोजन
इस दिन कई जगहों पर रामचरित मानस का पाठ भी करवाया जाता है, लेकिन यह पाठ राम-जानकी विवाह प्रसंग तक ही करते हैं। आगे का पाठ नहीं करते है ऐसा माना जाता है कि इसके आगे सीताजी को कष्टों का सामना करना पड़ा था, इसीलिए राम-जानकी विवाह जैसे शुभ प्रसंग के साथ ही पाठ का समापन कर देना चाहिए।

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