विजयादशमी या दशहरे के दिन दीपदान करने की परंपरा है।
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सनातन धर्म में दीपक को प्रकाश, ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना गया है। दीपक जलाना केवल अंधकार को दूर करना ही नहीं बल्कि जीवन में सुख-समृद्धि और विजय की कामना से भी जुड़ा हुआ है। विशेष रूप से विजयादशमी या दशहरे के दिन दीपदान करने की परंपरा है। धार्मिक और पौराणिक मान्यता है कि इस दिन विशेष स्थानों पर दीप जलाने से न केवल घर-परिवार में समृद्धि आती है, बल्कि जीवन में आने वाली बाधाएं भी समाप्त होती हैं और विजय की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं कि इस दिन किन-किन स्थानों पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
1. घर के मुख्य द्वार पर दीपक
विजयादशमी की संध्या को घर के मुख्य दरवाजे पर घी या तिल के तेल का दीपक जलाना बहुत शुभ माना गया है। यह दीपक घर में लक्ष्मी के आगमन का मार्ग प्रशस्त करता है और नकारात्मक ऊर्जा को घर में प्रवेश करने से रोकता है। पौराणिक मान्यता है कि द्वार पर दीपक जलाने से भगवान राम और माँ लक्ष्मी की कृपा घर पर बनी रहती है।
2. तुलसी के पौधे के पास दीपक
तुलसी माता को पवित्र और देवी स्वरूप माना गया है। विजयादशमी के दिन संध्या समय तुलसी के पौधे के पास दीपक जलाने से घर के सभी सदस्यों पर देवी लक्ष्मी और भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है। यह उपाय घर में शांति, सुख और वैभव बढ़ाता है।
3. पीपल या बरगद के वृक्ष के नीचे दीपक
धार्मिक ग्रंथों में पीपल और बरगद को देववृक्ष कहा गया है। विजयादशमी की रात इन वृक्षों के नीचे दीपक जलाने से पितरों का आशीर्वाद मिलता है और जीवन की रुकावटें दूर होती हैं। शास्त्रों में उल्लेख है कि देवताओं का वास पीपल में और यक्षों का वास बरगद में होता है, इसलिए इन वृक्षों के नीचे दीपदान विशेष फलदायी होता है।
4. देवी-देवताओं के मंदिर में दीपक
इस दिन निकटस्थ देवी या देवता के मंदिर में जाकर दीपक जलाना भी अत्यंत शुभ होता है। विशेषकर माँ दुर्गा, भगवान शिव या श्रीराम के मंदिर में दीपदान करने से जीवन में विजय की प्राप्ति होती है और शत्रु पर विजय का आशीर्वाद मिलता है। यह उपाय मनोबल को बढ़ाने वाला भी है।
5. रावण दहन स्थल पर दीपक
विजयादशमी के दिन जब रावण दहन होता है, तो उसके बाद स्थल पर दीपक जलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस उपाय से जीवन के सभी दुःख, बुराई और विघ्न नष्ट होते हैं। यह प्रतीक है कि जैसे भगवान राम ने अधर्म पर विजय प्राप्त की, वैसे ही दीपक जलाने से साधक के जीवन में अंधकार और संकट दूर होते हैं।