Vijayadashami 2024: विजयादशमी के दिन श्रीराम, मां दुर्गा, श्री गणेश और हनुमान जी की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल कामना की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन रामायण पाठ, सुंदरकांड और श्रीराम रक्षा स्तोत्र के पाठ से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
दशहरा को सभी शुभ कार्यों के लिए सर्वश्रेष्ठ तिथि माना जाता है। इस दिन अक्षर लेखन, गृह निर्माण, गृह प्रवेश, मुंडन, नामकरण, अन्नप्राशन, कर्ण छेदन और भूमि पूजन जैसे कार्य अत्यधिक शुभ माने जाते हैं। हालांकि, विवाह संस्कार इस दिन निषेध है। विजयादशमी का पर्व अच्छाई की बुराई पर जीत का प्रतीक है।
पौराणिक कथा
विजयादशमी की पूजा का महत्व
दशहरा के दिन मां दुर्गा और भगवान राम की पूजा का विशेष महत्व है। मां दुर्गा शक्ति की प्रतीक हैं, जबकि भगवान राम मर्यादा, धर्म और आदर्श के प्रतीक हैं। जीवन में शक्ति, धर्म और आदर्श का होना सफलता के मार्ग को प्रशस्त करता है।
विजयादशमी के मुहूर्त
विशेष योग और श्रवण नक्षत्र
इस वर्ष दशहरा के दिन रवि योग और सर्वार्थ सिद्धि योग का संयोग बन रहा है, जो ज्योतिष शास्त्र में अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। 12 अक्टूबर को पूरा दिन रवि योग रहेगा, जबकि सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 6:06 बजे से शुरू होकर पूरे दिन रहेगा। इस योग में किए गए कार्यों में सफलता की संभावना अधिक होती है। श्रवण नक्षत्र भी इस दिन अत्यंत शुभ माना गया है, जो 12 अक्टूबर को सुबह 5:25 बजे से 13 अक्टूबर सुबह 4:27 बजे तक रहेगा।
विजय का प्रतीक पान
दशहरा के दिन रावण, कुम्भकर्ण और मेघनाद के दहन के बाद पान का सेवन सत्य की जीत का प्रतीक माना जाता है। इस दिन हनुमान जी को मीठी बूंदी और पान अर्पित करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। विजयादशमी पर पान का सेवन और वितरण मान-सम्मान, प्रेम और विजय का प्रतीक है।
नीलकंठ पक्षी के दर्शन का महत्व
मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम ने रावण पर विजय प्राप्त करने से पूर्व नीलकंठ पक्षी के दर्शन किए थे। नीलकंठ पक्षी को भगवान शिव का प्रतीक माना जाता है। दशहरे के दिन नीलकंठ के दर्शन से जीवन में सुख, समृद्धि और भाग्य का उदय होता है।
पं. मनोज कुमार द्विवेदी ज्योतिषाचार्य