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Vat Savitri Vrat 2024: वट सावित्री व्रत के दिन भूलकर भी न करें ये गलतियां, अधूरी मानी जा सकती है पूजा

Tue, 04 Jun 2024 02:20 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Vat Savitri Vrat 2024: इस साल 6 जून को वट सावित्री का व्रत रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार इस दिन पूजा मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस समय वट वृक्ष की पूजा कर सकती हैं।
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Vat Savitri Vrat 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Vat Savitri Vrat 2024: जब-जब पति की लंबी आयु के लिए पूजा करने की बात आती है, तब-तब वट सावित्री व्रत का नाम लिया जाता है। यह उपवास सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है। हर साल ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि को वट सावित्री का व्रत रखने का विधान है। मान्यता है कि इस दिन विधिनुसार पूजा अर्चना करने से पति की लंबी आयु का आशीर्वाद मिलता है। इस दौरान पूजा के सभी कार्यों को शुभ मुहूर्त के अनुसार किया जाता है।

वट सावित्री पर वट वृक्ष की पूजा करना शुभ होता है, बिना इसके उपवास अधूर माना जाता है। इस दौरान वृक्ष के नीचे सावित्री और सत्यवान की प्रतिमा स्थापित जरूर करें। उनकी पूजा करने से सुहागिनों को अखंड सौभाग्यवती भव का आशीर्वाद मिलता है। पुराणों के अनुसार, वट वृक्ष के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु व अग्रभाग में शिव का वास माना गया है। इसलिए व्रत रखने वाली महिलाओं को इन सभी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस दौरान भूलकर भी कुछ कार्यों को करने से बचना चाहिए, अन्यथा अशुभ परिणाम मिल सकते हैं और वैवाहिक जीवन में समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसी कड़ी में आइए इस दिन क्या करें और क्या न करें, यह जान लेते हैं।

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कब रखा जाएगा वट सावित्री व्रत 2024 ?
इस साल 6 जून को वट सावित्री का व्रत रखा जाएगा। पंचांग के अनुसार इस दिन पूजा मुहूर्त प्रातः 11 बजकर 52 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। इस समय वट वृक्ष की पूजा कर सकती हैं।

वट सावित्री व्रत में न करें ये गलतियां
  • वट सावित्री व्रत में भूलकर भी सुहागिन महिलाएं नीले, काले और सफेद रंग के वस्त्र न पहनें। इसे अशुभ माना जाता है।
  • इस दिन जीवनसाथी के साथ किसी भी प्रकार का वाद-विवाद या झगड़ा न करें।
  • वट सावित्री व्रत कर रही महिलाएं इस दिन पति के साथ जीवनभर साथ-देने का संकल्प जरूर लें।
  • इस दिन तामसिक भोजन का सेवन न करें।
  • वट सावित्री के दिन 16 श्रृंगार करें। लेकिन भूलकर भी बाल न कटवाएं।
  • इस दिन व्रत कथा जरूर सुनें। इस दौरान कथा के बीच से उठकर नहीं जाना चाहिए। इससे आपकी पूजा अधूरी रह सकती है।
  • इस दौरान परिक्रमा करते हुए अपना पैर दूसरों को न लगने दें। इससे पूजा खंडित हो सकती है।
 
वट वृक्ष पूजन मंत्र
अवैधव्यं च सौभाग्यं देहि त्वं मम सुव्रते।
पुत्रान् पौत्रांश्च सौख्यं च गृहाणार्घ्यं नमोऽस्तुते।।

यथा शाखाप्रशाखाभिर्वृद्धोऽसि त्वं महीतले।
तथा पुत्रैश्च पौत्रैश्च सम्पन्नं कुरु मा सदा।।
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। इस लेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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