इस साल वैशाख पूर्णिमा की शुरुआत 4 मई को रात 11 बजकर 35 मिनट से होगी। इस तिथि का समापन 5 मई की रात 11 बजकर 02 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार वैशाख पूर्णिमा 5 मई को मनाई जाएगी।
05 मई को वैशाख पूर्णिमा है और इसी दिन बुद्ध जयंती भी मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष वैशाख पूर्णिमा के दिन ही बुद्ध पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु के 9वें अवतार महात्मा बुद्ध का जन्म वैशाख माह की पूर्णिमा तिथि को हुआ था। इस साल वैशाख पूर्णिमा और बुद्ध पूर्णिमा 5 मई को है। हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि पर गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ का खास महत्व होता है। इस साल वैशाख पूर्णिमा पर कई वर्षों के बाद दुर्लभ संयोग बन रहा है। इस दिन बुद्ध पूर्णिमा के दिन साल का पहला चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। आइए जानते हैं वैशाख पूर्णिमा का महत्व और शुभ मुहूर्त।
वैशाख पूर्णिमा शुभ मुहूर्त 2023
सनातन धर्म में वैशाख पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। वैशाख पूर्णिमा पर गंगा स्नान और पूजा करने की परंपरा होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख पूर्णिमा के दिन स्नान करने का मुहूर्त सुबह 4 बजकर 11 मिनट से 4 बजकर 55 मिनट तक रहेगी। ऐसे में इस दिन किसी पवित्र नदी में स्नान करके पुण्य लाभ कमाया जा सकता है। वहीं वैशाख पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय 5 बजकर 58 मिनट पर होग ऐसे में इस दिन चंद्रमा को अर्घ्य दे सकते हैं।
वैशाख पूर्णिमा का महत्व
वैशाख पूर्णिमा पर स्नान और दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन पीपल के पेड़ की विशेष रूप से पूजा की जाती है। इसके अलावा वैशाख पूर्णिमा पर सत्य विनायक व्रत रखने का भी विधान है। मान्यता है कि इस दिन सत्य विनायक व्रत रखने से व्रती की सारी दरिद्रता दूर हो जाती है। मान्यता है कि अपने पास मदद के लिये आये भगवान श्री कृष्ण ने अपने मित्र सुदामा (ब्राह्मण सुदामा) को भी इसी व्रत का विधान बताया था जिसके पश्चात उनकी गरीबी दूर हुई। वैशाख पूर्णिमा को धर्मराज की पूजा करने का विधान है मान्यता है कि धर्मराज सत्यविनायक व्रत से प्रसन्न होते हैं। इस व्रत को विधिपूर्वक करने से व्रती को अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता ऐसी मान्यता है। वैशाख पूर्णिमा पर तीर्थ स्थलों पर स्नान का तो महत्व है ही साथ ही इस दिन सत्यविनायक का व्रत भी रखा जाता है जिससे धर्मराज प्रसन्न होते हैं। इस दिन व्रती को जल से भरे घड़े सहित पकवान आदि भी किसी जरूरतमंद को दान करने चाहिये। स्वर्णदान का भी इस दिन काफी महत्व माना जाता है। व्रती को पूर्णिमा के दिन प्रात:काल उठकर स्नानादि से निवृत हो स्वच्छ होना चाहिए। तत्पश्चात व्रत का संकल्प लेकर भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। रात्रि के समय दीप, धूप, पुष्प, अन्न, गुड़ आदि से पूर्ण चंद्रमा की पूजा करनी चाहिये और जल अर्पित करना चाहिए। तत्पश्चात किसी योग्य ब्राह्मण को जल से भरा घड़ा दान करना चाहिए।