वैकुंठ पुत्रदा एकादशी 6 जनवरी को है। प्रति वर्ष यह पौष माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि के दिन पड़ती है। इसे पुत्रदा एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। वैकुंठ एकादशी में भगवान विष्णु की जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस एकादशी के पुण्य से संतान सुख की प्राप्ति होती है। वैकुंठ एकादशी के दिन तिरुमला वेंकटेश्वर मंदिर और श्रीरंगम के श्री रंगनाथ स्वामी मंदिर को बड़ी धूमधाम के साथ मनाया जाता है।
हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वैकुंठ एकादशी धनुर सौर माह के दौरान पड़ती है। तमिल कैलेंडर में धनुर्मास को मार्गाज्ही मास कहते हैं। मलयालम कैलेंडर में इसे स्वर्ग वथिल एकादशी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि जो व्यक्ति इस दिन सच्चे मन से भगवान विष्णु का स्मरण करता है, व्रत का पालन करता है उस व्यक्ति को वैकुंठ धाम यानि स्वर्ग लोक की प्राप्ति होती है।
वैकुंठ एकादशी व्रत के नियम
व्रत रखने वाले को दशमी के दिन लहसुन, प्याज से रहित शुद्घ भोजन करना चाहिए। एकादशी के दिन प्रातः स्नानादि से निवृत होकर श्री नारायण की भक्ति पूर्वक पूजा करनी चाहिए और दीपदान करना चाहिए। व्रत रखने वाले को दशमी के दिन से ही मन और वचन से ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए भगवान का ध्यान करते हुए अपना काम करना चाहिए।