सनातन परंपरा में भगवान शिव की साधना को कल्याणकारी माना गया है। महाशिवरात्रि पर महादेव की साधना से सभी कष्ट दूर और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जटाधारी भगवान शिव अपने भक्तों पर जल्दी प्रसन्न हो जाते हैं। शिव की साधना करने वाला साधक उनके आशीर्वाद से सफलता की सीढ़ी चढ़ता चला जाता है। चूंकि मानव शरीर आकाश, वायु, अग्नि, जल और पृथ्वी - पंचतत्वों से मिलकर बना है, ऐसे में इनसे जुड़े शिवलिंग की साधना विशेष फलदायी होती है। आइए पंचतत्वों से जुड़े ऐसे ही शिव मंदिरों के बारे में जानते हैं —
पृथ्वी
पृथ्वी तत्व से जुड़ा एकंबरनाथ शिव मंदिर तमिलनाडु के कांचीपुरम में स्थित है। देवाधिदेव भगवान शिव को सर्वोच्च देवता के रूप में पूजने वाले उपासकों के लिए यह मंदिर विशेष स्थान रखता है। इस मंदिर में स्थापित शिवलिंग को बालू का माना गया है। इसी कारण इसका जल से अभिषेक नहीं होता है। लगभग ढाई फुट ऊंचे गोल शिवलिंग को सिर्फ जल से छींटे लगाकर पूजा की जाती है।
जल
जल तत्व से जुड़ा पावन शिवधाम तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में स्थित है। भगवान शिव के इस मंदिर का नाम जम्बूकेश्वर है। इस मंदिर का निर्माण चोल राजवंश के राजा कोकेंगानन ने करवाया था। जंबुकेश्वर मंदिर को थिरुवनैकवल भी कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान शिव ने जब देवी पार्वती को किसी गुप्त स्थान पर साधना करने को कहा तो माता पार्वती ने कावेरी के तट पर जामुन के घने जंगलों में तपस्या की थी और अपनी दैवीय शक्ति और कावेरी के पवित्र जल की मदद से यहां पर शिवलिंग बनाकर विशेष साधना की थी। शिव की साधना के लिए यह महत्वपूर्ण मंदिर है। इस मंदिर में भूमिगत जल धारा है, जिसके कारण यहां पानी की कोई कमी नहीं पड़ती है।
अग्नि
अग्नि तत्व से संबंधित भगवान शिव का मंदिर तमिलनाडु के तिरुवन्नामलाई में स्थित है। भगवान शिव के इस विशाल मंदिर का नाम अरुणाचलेश्वर है। अरुणाचलेश्वर मन्दिर को अन्नामलाईयार मन्दिर के नाम से भी जाना जाता है। लगभग 10 हेक्टेयर में फैला हुआ भगवान शिव का यह मंदिर भारत के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। इस मंदिर के शिव का आकार गोलाई लिए हुए है और इसकी ऊंचाई तकरीबन तीन फिट है। मान्यता है कि भगवान शिव के इस पावन धाम में नंगे पांव जाने से पापों से मुक्ति मिल जाती है। अरुणाचलेश्वर मन्दिर का निर्माण नौवीं शताब्दी में पल्लव वंश के राजाओं ने करवाया था।
आकाश
तमिलनाडु के चिदंबरम शहर में स्थित नटराज का शिव मंदिर आकाश तत्व से जुड़ा माना जाता है। इस मंदिर में प्रधान देवता के रूप में भगवान नटराज विराजमान हैं। यह देश के उन चुनिंदा मंदिरों में से एक है, जहां शिव को प्राचीन लिंगम के स्थान पर मानवरूपी मूर्ति के रूप में प्रतिष्ठित किया गया है। दक्षिण भारत का यह प्राचीन मंदिर तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई से 245 किलोमीटर दूर चेन्नई-तंजावुर मार्ग पर स्थित है। भारत के पांच पवित्र शिव मंदिरों में से एक यह मंदिर 40 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। इस मंदिर के गर्भगृह में केवल पुजारियों को ही प्रवेश की इजाजत है।
वायु
आंध्र प्रदेश के चित्तुर जिले में वायु तत्व से जुड़ा भगवान शिव मंदिर है। तिरुपति से तकरीबन 40 किमी दूर काला हस्ती नाम का यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है। इस मंदिर में शिवलिंग की ऊंचाई तकरीबन चार फुट है। यहां शिवलिंग पर जल नहीं चढ़ाया जाता है। दक्षिण भारत में स्थित पावन शिव धामों में से एक इस मंदिर को दक्षिण का कैलाश या काशी भी कहते हैं। इस मंदिर में शिव के अभिषेक के लिए धोती पहनकर जाना अनिवार्य है।
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