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Chaitra Navratri 2019 : कलश से लेकर देवी पूजा की हर चीज करती है भक्तों का कल्याण, जानें कैसे?

Wed, 03 Apr 2019 12:02 PM IST
Madhukar Mishra अनीता जैन, वास्तुविद्
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Chaitra Navratri 2019
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शक्ति की उपासना का महापर्व है नवरात्रि। नवरात्रि की साधना से प्रसन्न होकर माता अपने साधकों पर पूरे वर्ष कृपा बरसाती हैं। नवरात्र के पावन दिनों में देवी भगवती की आराधना और साधना में प्रयोग लाई जाने वाली प्रत्येक पूजा सामग्री का प्रतीकात्मक महत्व होता है और हर एक सामग्री के पीछे कोई न कोई उद्देश्य या संदेश जुड़ा हुआ है ।

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कलश स्थापना
कलश 
धर्म शास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगलकामनाओं का प्रतीक माना गया है। कलश में सभी ग्रह, नक्षत्रों एवं तीर्थों का वास होता है, इसलिए नवरात्र पूजा में घट स्थापना का सर्वाधिक महत्व है। कलश में ही ब्रह्मा, विष्णु, रूद्र, सभी नदियां, सागरों, सरोवरों एवं 33  करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है, इसलिए विधिपूर्वक कलश पूजन से सभी देवी-देवताओं का पूजन हो जाता है।

जवारे
जवारे
नवरात्र पूजा में जौ को बेहद शुभ माना गया है। जौ समृद्धि, शांति, उन्नति और खुशहाली का प्रतीक होते हैं। ऐसी मान्यता है कि जौ उगने की गुणवत्ता से भविष्य में होने वाली घटनाओं का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है। माना जाता है कि अगर जौ तेज़ी से बढ़ते हैं, तो घर में सुख-समृद्धि आती है। यदि ये नहीं बढ़ते और मुरझाए हुए रहते हैं, तो भविष्य में किसी तरह के अमंगल का संकेत देते हैं।
 

बंदनवार
बंदनवार
प्राचीन काल से ही पूजा-अनुष्ठान के दौरान मुख्य द्धार पर आम या अशोक के पत्तों की बंदनवार लगाई जाती है। ऐसा करने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करतीं। मान्यता है कि देवी पूजा के प्रथम दिन देवी के साथ तामसिक शक्तियां भी होती हैं। देवी घर में प्रवेश करती हैं, पर बंदनवार लगी होने से तामसिक शक्तियां घर के बाहर ही रहती हैं।

दीपक
दीपक
नवरात्र के समय घर में शुद्ध देसी घी का अखंडदीप जलाने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, नकारात्मक ऊर्जाएं नष्ट होती हैं एवं इससे आस-पास का वातावरण शुद्ध हो जाता है। दीपक, साधना में सहायक तृतीय नेत्र और हृदय ज्योति का प्रतीक है। इससे हमें जीवन के उर्ध्वगामी होने, ऊंचा उठने और अन्धकार को मिटा डालने की प्रेरणा मिलती है।

गुड़हल का पुष्प
गुड़हल का पुष्प
पौराणिक मान्यता है कि गुड़हल के पुष्प अर्पित करने से देवी प्रसन्न होकर भक्तों की हर मनोकामना को पूर्ण करती हैं। सुर्ख लाल रंग का यह पुष्प अति कोमल होने के साथ ही असीम शक्ति और ऊर्जा का प्रतीक माना गया है, इसलिए लाल गुड़हल देवी माँ को अत्यंत प्रिय है।
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नारियल
नारियल
नवरात्र पूजा में कलश के ऊपर नारियल पर लाल कपड़ा और मोली लपेटकर रखने का विधान है। माना जाता है कि इससे सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। नारियल के बाहरी आवरण को अहंकार का प्रतीक और आंतरिक भाग को पवित्रता और शांति का प्रतीक माना जाता है। माँ दुर्गा के समक्ष नारियल को तोड़ने का तात्पर्य अहंकार को तोड़ना है। 
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