प्रथम पूज्य भगवान गणपति की 10 दिनों तक पूजा-अर्चना के बाद आज 11वें दिन अनंत चतुर्दशी को उनकी भव्य विदाई की जाएगी। देश-विदेश में आज गणपति के भक्त अपने देवता को विदाई देने के लिए नदी, सरोवर, समुद्र आदि में विसर्जित करने के लिए पहुंचेंगे। महाराष्ट्र में जिस समय भक्तगण अपने पूज्य देवता को बैंड-बाजे के साथ नाचते-झूमते विदाई देने के लिए निकलते हैं, उस समय पूरा रास्ता गणपतिमय हो जाता है। हर तरफ सिर्फ एक आवाज गूंजती है गणपति बप्पा मोरया...।
गणपति विसर्जन का महत्व
सनातन परंपरा में गणपति पूजन का विशेष स्थान है। किसी भी देवता की पूजा या शुभ कार्य का शुभारंभ गणपति पूजन के साथ ही होता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार महर्षि वेदव्यास ने महाभारत की कथा सुनाने के पश्चात् देवाधिदेव श्री गणेश जी का तेज शांत करने के लिए उन्हें सरोवर में स्नान करवाया था। उस दिन अनंत चतुर्दशी थी और तभी से इस पावन दिन गणपति को पवित्र सरोवर, नदी और समुद्र आदि में विसर्जित करने की परंपरा शुरू हुई।
गणपति विसर्जन का शुभ मुहूर्त
13 सितंबर से शुरू हुए गणेशोत्सव के बाद गणपति की विदाई करने के लिए कुछ लोग तीसरा, पांचवा और सातवां दिन चुनते हैं। वहीं अधिकांश लोग गणपति को अनंत चतुर्दशी के पावन दिन विदा करते हैं। आज अनंत चतुर्दशी पर गणेश विसर्जन का शुभ समय प्रात: 23 सितंबर को सुबह प्रात: 07: 49 से दोपहर 12:19 तक और दोपहर 01:49 से दोपहर 03:19 तक है। इसी तरह गणपति के भक्त सायंकाल 06:19 से रात 10:49 तक और रात्रि 01:49 से 03:19 मिनट तक अपने पूज्य देवता की विदाई कर सकते हैं।