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4 सितंबर को रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि के संयोग में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव, जानिए पूजन विधि और शुभ मुहूर्त

Mon, 31 Aug 2026 05:07 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही शुभ योग और नक्षत्र में मनाई जाएगी। जिसमें कान्हा की पूजा बहुत ही लाभदायी होगी और सभी तरह की मनोकामनाएं पूरी होंगी। 
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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर शुभ संयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शुक्रवार, 4 सितंबर को देशभर में बड़े ही जोश, उत्साह और भक्ति भाव से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। पंचांग गणना के अनुसार इस वर्ष जन्माष्टमी पर वर्षों पर विशेष संयोग बन रहा है। दरअसल इस बार भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में मनाया जाएगा। धर्म शास्त्रों के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण का जन्म मध्यरात्रि को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में हुआ था, उसी तरह का संयोग इस बार भी देखने को मिलेगा। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, कई बार तो जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि को रहती है लेकिन रोहिणी नक्षत्र का संयोग नहीं देखने को मिलता है। इस बार जन्माष्टमी पर रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का संयोग बन रहा है। इस वजह से जन्माष्टमी का विशेष संयोग देखने को मिल रहा है। इस बार शैव और वैष्णव दोनों ही प्रमुख संप्रदायों में कृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। 
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रोहिणी नक्षत्र का संयोग
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जन्माष्टमी की आधी रात को अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र का एक साथ होना बहुत ही विशेष फलदायी और शुभ माना जाता है। कई बार जन्माष्टमी पर अष्टमी तिथि पर चंद्रमा वृषभ राशि में होते हैं लेकिन रोहिणी नक्षत्र नहीं रहता है। लेकिन इस बार जन्माष्टमी पर चंद्रमा वृषभ राशि, रोहिणी नक्षत्र और अष्टमी तिथि का संयोग बन रहा है। ऐसे में इस तरह के संयोगों में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का महत्व बढ़ गया है। 

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श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजन विधि
हिंदू धर्म में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के त्योहार का विशेष महत्व होता। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र में कान्हा का प्राक्ट्य पर्व मनाय जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा करने से व्यक्ति बाधाओं और संकटों से मुक्ति होकर जीवन में सुख-समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति करता है। कृष्ण भक्तों को जन्माष्टमी के त्योहार का इंतजार हर वर्ष होता है। ऐसे में इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हुए साफ-सुथरे कपड़े धारण करें। फिर सूर्यदेव को अर्ध्य देकर व्रत और पूजा का संकल्प लें। जिन घरों में भगवान कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा होती है उनको सुबह स्नान कराते हुए, नए कपड़े पहनाएं। पूजन स्थल पर माता देवकी की भी फोटो की पूजा करते हुए वासुदेव, बलदेव,नंद और यशोदा के नामों का जाप करें। इसके बाद रात्रि को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाएं। इस दिन कान्हा को पीले वस्त्र और केसर युक्त माथे पर तिलक जरूर लगाएं, साथ ही मोर मुकुट और बांसुरी जरूर अर्पित करें। इसके बाद लड्डू गोपाल को पंचामृत से अभिषेक और स्नान कराते हुए उन्हें  नए वस्त्र पहनाएं और झूला झूलाएं। फिर धनिये की पंजीरी, माखन-मिश्री का भोग लाएं और सभी भक्तों को प्रसाद का वितरण करें। 
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कृष्ण जन्माष्टमी पूजन शुभ मुहूर्त 2026
वृषभ लग्न- रात्रि 9 बजकर 43 मिनट से लेकर 11 बजकर 40 मिनट तक।
निशीथ लग्न- मध्यरात्रि 11 बजकर 49 मिनट से लेकर 01 बजकर 14 मिनट तक।
निशिता पूजा- 01 घंटा 25 मिनट

कान्हा को अर्पित करें ये चीजें
जन्माष्टमी पर कान्हा को प्रसन्न करने के लिए कई चीजें अर्पित करने के मान्यताएं हैं। धन और वंश वृद्धि के लिए जन्माष्टमी पर पीला फूल और इत्र अर्पित करें। वहीं वैवाहिक जीवन में सुखी पाने के लिए हल्दी और केसर अर्पित करें। अच्छी सेहत, सौंदर्य और निरोगी काया के लिए खीर, हलवा, माखन और मिश्री अर्पित करें। 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
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