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शरद पूर्णिमा कल: भगवान श्रीकृष्ण का गोपियों संग महारास और खुले आसमान में खीर रखने का महत्व, जानिए मान्यताएं

Sat, 24 Oct 2026 02:02 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हिंदू धर्म में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। इस दिन चांद अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण रहता है।  इस रात को खुले आसमान में खीर रहने की परंपरा होती है और भगवान श्रीकृष्ण महारास रचाते हैं। आइए जानते हैं क्या-क्या हैं मान्यताएं। 
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Sharad Purnima 2026 - फोटो : ai
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विस्तार
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द्रिक पंचांग के अनुसार, 25 अक्तूबर को शरद पूर्णिमा का त्योहार है। पंचांग के अनुसार, हर वर्ष आश्विन माह की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा का पर्व मनाया जाता है, इसे कोजागरी और रास पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। सभी पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। शरद पूर्णिमा को लेकर कई तरह की धार्मिक मान्यताएं हैं। इस खुले आसमान के नीचे खीर रखने का महत्व होता है। इस दिन चंद्रमा अपनी सभी 16 कलाओं में होता है, इस दिन मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और भगवान श्रीकृष्ण गोपियों संग महारास रचाते हैं। इस बार शरद पूर्णिमा की तिथि को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में आइए जानते हैं तिथि, पूजा मुहूर्त, चंद्रोदय, खीर रखने का समय और मान्यताएं। 
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कब है शरद पूर्णिमा तिथि 2026 ?
द्रिक पंचांग के अनुसार, शरद पूर्णिमा की तिथि की शुरुआत 25 अक्तूबर को सुबह 11 बजकर 55 मिनट से होगी, जिसका समापन 26 अक्तूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगा। ऐसे में शरद पूर्णिमा 25 अक्तूबर को मनाई जाएगी और पूर्णिमा तिथि पर दान और स्नान 26 अक्तूबर को किया जाएगा। 

शरद पूर्णिमा पर चंद्रोदय का समय 
  • चांद के निकलने का समय- 25 अक्तूबर शाम 05: 40 मिनट। 
  • शरद पूर्णिमा पर खीर रखने का समय- रात 08: 30 मिनट से लेकर 11: 30 मिनट तक।
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शरद पूर्णिमा की मान्यताएं
  • देवी लक्ष्मी रात को करती हैं पृथ्वी पर भ्रमण- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात देवी लक्ष्मी वैकुंठ धाम से पृथ्वी लोक आती हैं और रातभर भक्तों के घर-घर जाकर भ्रमण करती हैं। इस रात को भक्त रातभर जाग कर मां लक्ष्मी की पूजा, मंत्रों का जाप और दीपक जलाते हैं। 
  • भगवान कृष्ण करते हैं गोपियों संग रास- श्रीमद्वभागवत महापुराण के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात को भगवान श्रीकृष्ण गोपियों संग रासलीला करते हैं। इस रात चांद अपनी सभी 16 कलाओं से परिपूर्ण रहते हैं। भगवान श्रीकृष्ण महारास को गोपियों संग भक्ति का स्वरूप माना जाता है। 
शरद पूर्णिमा की रात को खीर रखने की परंपरा
  • शरद पूर्णिमा की रात को चांद अपनी सभी 16 कलाओं में परिपूर्ण रहते हैं। इस रात को दूध, चावल, चीनी और मेवों से बनी खीर को खुले आसमान के नीचे चांद की रोशनी में रखने की परंपरा होती है। ऐसी मान्यता है, शरद पूर्णिमा की रात को चांद की किरणें से अमृतमयी वर्षा होती है। ऐसे में खीर में ये अमृत तुल्य रोशनी पड़ने से इसमें औषधीय गुण आ जाते हैं। 

शरद पूर्णिमा पर क्या करना शुभ ?
  • शरद पूर्णिमा पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
  • शरद पूर्णिमा की रात को घर में दीपक जलाएं।
  • शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी के मंत्रों का 108 बार जाप करें। 
  • भगवान सत्यनारायण की कथा सुनें। 
  • रात्रि जागकर भजन और कीर्तन करना शुभ

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