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Sawan Somwar Vrat 2024: आज सावन का पहला सोमवार, जानिए महादेव पूजा विधि और मंत्र-आरती

Mon, 22 Jul 2024 06:17 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Sawan Somwar Vrat 2024 - फोटो : अमर उजाला
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Sawan Somwar Vrat 2024: आज यानी 22 जुलाई 2024 सोमवार, से सावन माह की शुरुआत हो रही है। माह की शुरुआत सोमवार से होने के कारण इस दिन को बेहद शुभ माना जा रहा है। आज यानी सावन के पहले सोमवार को प्रीति योग, आयुष्मान योग, स्वार्थ सिद्ध योग और शिववास योग बन रहा है। माना जाता है कि इस योग में महादेव की पूजा अर्चना करने से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती हैं। इस दिन व्रत रखने का भी विधान है। सावन सोमवार के इस उपवास को रखने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। वहीं इस दौरान चातुर्मास होने के कारण हर शुभ मांगलिक कार्यक्रम में भगवान शिव का आशीर्वाद बना रहता है।

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बता दें चातुर्मास में पूरी सृष्टि की संचालन शंकर जी के हाथों में होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास के आरंभ होने पर महादेव की पूजा करना और उनसे जुड़े  शुभ और मांगलिक कार्य करना शुभ होता है। इस दौरान कुछ खास उपाय करने से आर्थिक स्थिति में सुधार होता है। ऐसे में आइए सावन के पहले सोमवार के इस खास मौके पर शिव जी की पूजा विधि और पूजा मंत्रों के बारे में विस्तार से जान लेते हैं।

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सावन माह में आने वाले सभी सोमवार की तारीख 2024
पहला सोमवार - 22 जुलाई
दूसरा सोमवार - 29 जुलाई
तीसरा सोमवार - 05 अगस्त
चौथा सोमवार - 12 अगस्त
पांचवां सोमवार - 19 अगस्त

इस विधि से करें महादेव की पूजा
सावन के पहले सोमवार पर सुबह जल्दी उठना चाहिए। फिर स्नान करें और साफ वस्त्रों को धारण करें। इसके बाद घर या मंदिर जहां भी पूजा करनी है, वहां पर पूजा की सभी सामग्रियों को एकत्रित कर के रख लें। फिर सबसे पहले विधिपूर्वक भगवान शिव का अभिषेक करें। इसके बाद उन्हें फल, पुष्प, धूप, बेलपत्र, अक्षत आदि चीजें अर्पित करते जाएं। फिर देसी घी का दीपक जलाएं और शिव जी के मंत्रों का जाप करते रहें। इसके बाद शंकर जी की संपूर्ण आरती करें। फिर सुख-समृद्धि की कामना करते हुए महादेव का आशीर्वाद लें और श्रद्धा अनुसार दान करें।

सावन सोमवार पूजा सामग्री
सावन सोमवार की पूजा में भोलेनाथ की तस्वीर, शिवलिंग पूजा के बर्तन, दही,शुद्ध देशी घी, शहद, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, गाय का दूध और गंगाजल को शामिल करें। साथ ही कपूर, धूप, दीप, रूई, जनेऊ, चंदन, केसर, अक्षत, इत्र, लौंग, छोटी इलायची, मौली, रक्षा सूत्र, भस्म,शिव चालीसा को भी रखें।

सावन में करें ये उपाय
  • मान्यताओं के अनुसार सावन गन्ने के रस से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करना चाहिए। इससे जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
  • सावन सोमवार के दिन शिव जी को बेलपत्र, बेल की माला और नैवेद्य अर्पित करना चाहिए, इससे भगवान शिव के साथ-साथ देवी लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्त होती है।
  • महादेव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करने से संतान की प्राप्ति होती है।
  • सावन सोमवार के दिन शंकर जी की विधि अनुसार पूजा करने पर कष्टों से छुटकारा मिलता है। साथ ही राहु-केतु के अशुभ प्रभाव भी कम होते हैं।
 
सावन सोमवार व्रत नियम
  • सावन सोमवार का व्रत रखने वाले लोगों को सुबह जल्दी ही महादेव की पूजा अर्चना करनी चाहिए।
  • इस व्रत में दिन में नहीं सोना चाहिए। इसके अलावा एक ही समय भोजन करें।
  • सावन सोमवार के व्रत में तामसिक चीजों का सेवन करने की मनाही होती है।
  • व्रत में असत्य बोलने, झूठे आरोप लगाने और हिंसा करने से बचना चाहिए।
     
शिव जी की आरती 

ओम जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव अर्द्धांगी धारा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
एकानन चतुरानन पञ्चानन राजे। हंसानन गरूड़ासन
वृषवाहन साजे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
दो भुज चार चतुर्भुज दसभुज अति सोहे।
त्रिगुण रूप निरखते त्रिभुवन जन मोहे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
अक्षमाला वनमाला मुण्डमालाधारी।
त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे।
सनकादिक गरुड़ादिक भूतादिक संगे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका।
मधु कैटव दोउ मारे, सुर भयहीन करे।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
लक्ष्मी, सावित्री पार्वती संगा।
पार्वती अर्द्धांगी, शिवलहरी गंगा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
पर्वत सोहें पार्वतू, शंकर कैलासा।
भांग धतूर का भोजन, भस्मी में वासा।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
जया में गंग बहत है, गल मुण्ड माला।
शेषनाग लिपटावत, ओढ़त मृगछाला।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
काशी में विराजे विश्वनाथ, नन्दी ब्रह्मचारी।
नित उठ दर्शन पावत, महिमा अति भारी।।
ओम जय शिव ओंकारा।।
त्रिगुणस्वामी जी की आरति जो कोई नर गावे।
कहत शिवानन्द स्वामी मनवान्छित फल पावे।।
ओम जय शिव ओंकारा।। ओम जय शिव ओंकारा।।

महामृत्युंजय मंत्र
ऊँ हौं जूं स: ऊँ भुर्भव: स्व: ऊँ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। 
ऊर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ऊँ भुव: भू: स्व: ऊँ स: जूं हौं ऊँ।।

शिव जी का मूल मंत्र
ऊँ नम: शिवाय।।

भगवान शिव के प्रभावशाली मंत्र
ओम साधो जातये नम:।। ओम वाम देवाय नम:।।
ओम अघोराय नम:।। ओम तत्पुरूषाय नम:।।
ओम ईशानाय नम:।। ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।।

शिव के प्रिय मंत्र
ॐ नमः शिवाय।
नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।

शिव चालीसा 

॥ दोहा ॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,
मंगल मूल सुजान ।
कहत अयोध्यादास तुम,
देहु अभय वरदान ॥

॥ चौपाई ॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला ।
सदा करत सन्तन प्रतिपाला ॥

भाल चन्द्रमा सोहत नीके ।
कानन कुण्डल नागफनी के ॥

अंग गौर शिर गंग बहाये ।
मुण्डमाल तन क्षार लगाए ॥

वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे ।
छवि को देखि नाग मन मोहे ॥ 

मैना मातु की हवे दुलारी ।
बाम अंग सोहत छवि न्यारी ॥

कर त्रिशूल सोहत छवि भारी ।
करत सदा शत्रुन क्षयकारी ॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे ।
सागर मध्य कमल हैं जैसे ॥

कार्तिक श्याम और गणराऊ ।
या छवि को कहि जात न काऊ ॥ 

देवन जबहीं जाय पुकारा ।
तब ही दुख प्रभु आप निवारा ॥

किया उपद्रव तारक भारी ।
देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी ॥

तुरत षडानन आप पठायउ ।
लवनिमेष महँ मारि गिरायउ ॥

आप जलंधर असुर संहारा ।
सुयश तुम्हार विदित संसारा ॥ 

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई ।
सबहिं कृपा कर लीन बचाई ॥

किया तपहिं भागीरथ भारी ।
पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी ॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं ।
सेवक स्तुति करत सदाहीं ॥

वेद नाम महिमा तव गाई।
अकथ अनादि भेद नहिं पाई ॥ 

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला ।
जरत सुरासुर भए विहाला ॥

कीन्ही दया तहं करी सहाई ।
नीलकण्ठ तब नाम कहाई ॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा ।
जीत के लंक विभीषण दीन्हा ॥

सहस कमल में हो रहे धारी ।
कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी ॥ 

एक कमल प्रभु राखेउ जोई ।
कमल नयन पूजन चहं सोई ॥

कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर ।
भए प्रसन्न दिए इच्छित वर ॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी ।
करत कृपा सब के घटवासी ॥

दुष्ट सकल नित मोहि सतावै ।
भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै ॥ 

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो ।
येहि अवसर मोहि आन उबारो ॥

लै त्रिशूल शत्रुन को मारो ।
संकट से मोहि आन उबारो ॥

मात-पिता भ्राता सब होई ।
संकट में पूछत नहिं कोई ॥

स्वामी एक है आस तुम्हारी ।
आय हरहु मम संकट भारी ॥ 

धन निर्धन को देत सदा हीं ।
जो कोई जांचे सो फल पाहीं ॥

अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी ।
क्षमहु नाथ अब चूक हमारी ॥

शंकर हो संकट के नाशन ।
मंगल कारण विघ्न विनाशन ॥

योगी यति मुनि ध्यान लगावैं ।
शारद नारद शीश नवावैं ॥ 

नमो नमो जय नमः शिवाय ।
सुर ब्रह्मादिक पार न पाय ॥

जो यह पाठ करे मन लाई ।
ता पर होत है शम्भु सहाई ॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी ।
पाठ करे सो पावन हारी ॥

पुत्र हीन कर इच्छा जोई ।
निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई ॥ 

पण्डित त्रयोदशी को लावे ।
ध्यान पूर्वक होम करावे ॥

त्रयोदशी व्रत करै हमेशा ।
ताके तन नहीं रहै कलेशा ॥

धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे ।
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे ॥

जन्म जन्म के पाप नसावे ।
अन्त धाम शिवपुर में पावे ॥ 

कहैं अयोध्यादास आस तुम्हारी ।
जानि सकल दुःख हरहु हमारी ॥

॥ दोहा ॥
नित्त नेम कर प्रातः ही,
पाठ करौं चालीसा ।
तुम मेरी मनोकामना,
पूर्ण करो जगदीश ॥

मगसर छठि हेमन्त ॠतु,
संवत चौसठ जान ।
अस्तुति चालीसा शिवहि,
पूर्ण कीन कल्याण ॥

 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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