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Sawan Shivratri 2020: कब है सावन शिवरात्रि का त्योहार, जानिए इसका महत्व

Tue, 14 Jul 2020 07:46 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

  • 19 जुलाई 2020 को सावन शिवरात्रि है।
  • हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है।
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सावन मासिक शिवरात्रि 2020 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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19 जुलाई को सावन शिवरात्रि का त्योहार है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि के दिन मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। शिवरात्रि पर शिव भक्त इस दिन पूरे दिन उपवास रखकर शिवजी का आराधना करते हैं। सावन के महीने में पड़ने वाली शिवरात्रि का खास महत्व होता है। इस दिन शिवलिंग पर विशेष पूजा आराधना और जलाभिषेक कर भगवान शिव को प्रसन्न किया जाता है। सावन के पवित्र महीने में मासिक शिवरात्रि को बहुत ही शुभफलदायी माना जाता है। 
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मासिक शिवरात्रि का महत्व
मासिक शिवरात्रि पर भगवान शंकर पर जलाभिषेक किया जाता है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस प्रमुख शिव मंदिरों में विशेष पूजा-पाठ किया जाता है। गंगाजल से शिवलिंग पर जलाभिषेक कर हर तरह की मनोकामना की पूर्ति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद लिया जाता है। मान्यता है जो भी शिवभक्त सावन शिवरात्रि पर भोलेनाथ का जलाभिषेक करता है उसकी सभी तरह की इच्छाएं जरूर पूरी होती है।

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सावन शिवरात्रि जलाभिषेक मुहूर्त
भगवान शिव की पूजा दिन के चारों मुहूर्त में करने का विधान होता है।
चतुर्दशी तिथि आरंभ- 19 जुलाई 2020, 12: 41 AM
चतुर्दशी तिथि समाप्त- 20 जुलाई 2020, 12: 10 AM

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सावन शिवरात्रि व्रत विधि
शिवपुराण में बताया गया है कि शिव भक्तों को मासिक शिवरात्रि पर उपवास और शिवलिंग पर जलाभिषेक कर भोले भंडारी का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए। शिवरात्रि पर सुबह जल्दी स्नान करने के बाद पास के शिव मंदिर में जाकर भगवान शिव की विधिवत आराधना करनी चाहिए। शिव पूजा में प्रयोग की जानी वाली सभी तरह की सामग्रियों को भोलेभंडारी को अर्पित करें। अगले दिन अपना व्रत तोड़कर शिव पूजा संपन्न हो जाती है। 

सावन मासिक शिवरात्रि पर भगवान शिव को भांग धतूर ,बेलपत्र और गंगा जल अर्पित करें। इसीलिए जो इस माह में शिव पर गंगाजल चढाते हैं, वे देव तुल्य होकर  जीवन मरण के बंधन से मुक्त हो जाते हैं । मानशिक परेशानी, कुंडली में अशुभ चन्द्र का दोष, मकान-वाहन का सुख और संतान से संबधित चिंता शिव आराधना से दूर हो जाती है। इस माह में सर्पों को दूध पिलाने कालसर्प-दोष से मुक्ति मिलती है और उसके वंश का विस्तार होता है। ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवायका जप करते हुए शिव आराधना करें।
 
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