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Sawan Calendar 2025: शिवजी का प्रिय महीना सावन आज से शुरू, जानिए इस माह क्यों पूजे जाते हैं भोलेभंडारी ?

Fri, 11 Jul 2025 07:38 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan Calendar 2025: सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को अतिप्रिय होता है। यह महीना भगवान शिव की पूजा-आराधना करने के लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ माना गया है। ऐसी मान्यता है इस महीने में शिवजी की कृपा बहुत जल्दी मिलती है। इस बार सावन माह की शुरुआत 11 जुलाई से हो रही है।
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Sawan Calendar 2025: शिव भक्ति और आराधना का महीना सावन - फोटो : Adobe Stock
Sawan Calendar 2025: आज से भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना सावन शुरू हो गया है। हिंदू धर्म में सावन के महीने का विशेष महत्व होता है। सावन का महीना जिसे श्रावण भी कहा जाता है, यह हिंदू कैलेंडर का पांचवा महीना होता है। सावन का महीना विशेष रूप से भगवान शिव को समर्पित होता है। यह माह भगवान शिव को अतिप्रिय होता है। सावन के महीने में भगवान शिव और माता पार्वती की विशेष रूप से पूजा-आराधना करने का महत्व होता है,जिसमें व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृंत्युजय जाप और कांवड़ यात्राएं निकाली जाती हैं। इस वर्ष सावन सावन का पवित्र महीना 11 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगा। सावन के महीने में आने वाले सोमवार व्रत, प्रदोष और सावन शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा करने से हर तरह की मनोकामनाएं पूरी होती है और पूजा का पूरा फल मिलता है। शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ देवशयनी एकादशी से लेकर कार्तिक देवउठनी एकादशी तक यानी चार माह तक भगवान विष्णु को जो इस सृष्टि के पालनहार हैं वे क्षीर सागर में योग निद्रा में रहते हैं। इस दौरान भगवान शिव सृष्टि का संचालन संभालते हैं। इस कारण से सावन के महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा-आराधना करने का महत्व होता है। आइए जानते हैं देवों के देव महादेव को सावन का महीना क्यों बहुत प्रिय होता है ? सावन के महीने का क्या है धार्मिक महत्व ? सावन में क्यों होती है शिव आराधना ? शिव पूजा विधि और इससे जुड़ी परंपराएं और कथाएं सबकुछ सावन कैलेंडर 2025 में।
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sawan 2025 - फोटो : adobe
Sawan 2025: सावन का महीना कब से कब तक
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष सावन का पवित्र महीना 11 जुलाई, शुक्रवार से शुरू हो रहा है और यह 9 अगस्त तक चलेगा। इस बार सावन का महीना पूरे 30 दिनों तक रहेगा। ऐसे में 30 दिनों तक लगातार शिव आराधना, भक्ति, साधना, पूजा, तप और धार्मिक अनुष्ठान के लिए विशेष फलदायी होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में शिव आराधना करने पर पूजा और तपस्या का फल कई गुना अधिक मिलता है। 

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sawan 2025 - फोटो : adobe
सावन सोमवार पर शुभ योग
सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है और इस माह में पड़ने वाले सभी सोमवार का विशेष महत्व होता है। साल 2025 में सावन के महीने में कुल 4 सोमवार आएंगे। सावन सोमवार व्रत का विशेष महत्व होता है। इसमें भगवान शिव की विधिवत पूजा-आराधना और व्रत रखने का विधान होता है। इस बार सावन महीने का पहला सोमवार 14 जुलाई को पड़ रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस साल सावन के पहले सोमवार पर कई तरह के शुभ योग और ग्रहों के अच्छे योगों का निर्माण हो रहा है। 

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sawan 2025 - फोटो : adobe
सावन सोमवार 2025 की प्रमुख तिथियां
  • पहला सावन सोमवार- 14 जुलाई 2025
  • दूसरा सावन सोमवार-  21 जुलाई 2025
  • तीसरा सावन सोमवार- 28 जुलाई 2025
  • चौथा सावन सोमवार-  04 अगस्त 2025

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sawan 2025 - फोटो : abobe
सावन माह 2025 के व्रत-त्योहार 

11 जुलाई- सावन माह प्रारंभ
12 जुलाई- जया पार्वती व्रत
14 जुलाई- सावन का पहला सोमवार व्रत, संकष्टी चतुर्थी
16 जुलाई- कर्क संक्रांति 
17 जुलाई- कालाष्टमी
21 जुलाई- सावन का दूसरा सोमवार, कामिका एकादशी
22 जुलाई- भौम प्रदोष व्रत
23 जुलाई- सावन शिवरात्रि
24 जुलाई- हरियाली अमावस्या
27 जुलाई- हरियाली तीज 
28 जुलाई- सावन का तीसरा सोमवार
29 जुलाई-  नाग पंचमी
31 जुलाई-  तुलसीदाज जयंती
04 अगस्त-  सावन का चौथा सोमवार
05 अगस्त-  श्रावण पुत्रदा एकादशी
06 अगस्त- प्रदोष व्रत
08 अगस्त- वरलक्ष्मी व्रत
09 अगस्त- रक्षाबंधन
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sawan 2025 - फोटो : adobe
सावन माह का धार्मिक महत्व
पुराणों में श्रावण के महीने का विशेष महत्व होता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान भोलेभंडारी को सावन का महीना बहुत ही प्रिय होता है। दरअसल इसके पीछे एक कथा है जिसके अनुसार यह वही महीना है जब माता पार्वती भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या कर रहीं थीं, तब भगवान शिव माता की तपस्या से प्रसन्न होकर उन्हें पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। वहीं एक दूसरी मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव अपनी ससुराल यानी पृथ्वी लोक में आए थे, तब सभी ने उनका  स्वागत करने के लिए जलाभिषेक किया था। इस कारण से सावन का महीना भगवान शिव को बहुत ही प्रिय होता है। इसमें शिव भक्त अपने प्रभु का आशीर्वाद पाने के लिए पूजा-आराधना करते हैं। 

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सावन में सृष्टि को संभालते हैं भोलेनाथ इसलिए श्रावण माह खास
हर वर्ष आषाढ़ देवशयनी एकादशी से लेकर अगले चार माह तक सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु क्षीर सागर में योग निद्रा में रहते हैं। ऐसे में भगवान शिव सृष्टि का कार्यभार संभालते हैं। इस कारण से श्रावण का महीना भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष होता है। 

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सावन माह में रुद्राभिषेक का महत्व
भगवान शिव के रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार रुद्राभिषेक करने से शिव जी की विशेष कृपा मिलती है और ग्रह दोषों से मुक्ति मिलती है। सावन में भगवान शिव का जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का विशेष महत्व होता है। सावन के महीने में ही समुद्र मंथन हुआ था। जिसमें से अमृत के अलावा हालाहल विष भी निकला था, लेकिन इस विष के चलते समूची सृष्टि में हाहाकार मच गया था। तब भगवान शिव ने अपने गले में इस विष को धारण सभी को बचाया था। विष के प्रकोप से भगवान शिव का ताप लगातार बढ़ रहा था। ऐसे में विष के असर को कम करने के लिए सभी देवी-देवताओं ने उन पर जल चढ़ाया था। तभी से शिवलिंग पर जलाभिषेक और रुद्राभिषेक का महत्व है। 

 

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सावन में शिव आराधना में न करें इन चीजों का इस्तेमाल
- भगवान शिव को कभी भी केतकी के फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। मान्यता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज होते हैं। 
- इसके अलावा भगवान शिव की पूजा में उन्हें तुलसी नहीं चढ़ाना चाहिए।
- अगर आप भगवान शिव पर नारियल का पानी चढ़ाते हैं तो वह भी वर्जित होता है।
- भगवान शिव को जलाभिषेक किसी कांस्य या पीतल के बर्तन से ही जल चढ़ाएं।
- शिवलिंग पर न ही हल्दी और कुमकुम लगाना चाहिए।
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महामृत्युंजय मंत्र

ॐ हौं जूं सः ॐ भूर्भुवः स्वः
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्
उर्वारुकमिव बन्धनान्
मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ स्वः भुवः भूः ॐ सः जूं हौं ॐ !!

शिव एकादशाक्षरी मंत्र
ओम नम: शिवाय शिवाय नम:। 

शिव स्तुति मंत्र
ओम नम: श्म्भ्वायच मयोंभवायच
नम: शंकरायच मयस्करायच
नम: शिवायच शिवतरायच।।

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