सावन मास शिवभक्तों के लिए अत्यंत पावन होता है। इस माह में भगवान शिव का पूजन, अभिषेक और जप सभी मनोरथों की पूर्ति का साधन माना गया है। शिवलिंग की पूजा को शास्त्रों में विशेष स्थान प्राप्त है, परंतु प्राचीन ग्रंथों में पारद शिवलिंग को सबसे श्रेष्ठ और सिद्धिदायक बताया गया है। पारद शिवलिंग की पूजा से न केवल लौकिक सुख-संपत्ति की प्राप्ति होती है, बल्कि यह मोक्षदायी भी है।
1. पारद शिवलिंग: शिव का जीवंत प्रतीक
पारद यानी पारा, जिसे रसराज भी कहा गया है, महादेव के शरीर से उत्पन्न शुक्र तत्त्व से संबंधित माना गया है। इसलिए शास्त्रों में पारद को शिव का साक्षात स्वरूप कहा गया है। पारद शिवलिंग को विशेष गोपनीय तंत्रशास्त्रीय विधियों से और कई दुर्लभ जड़ी-बूटियों के सहयोग से सिद्ध किया जाता है, जिससे यह अत्यंत प्रभावशाली बनता है। यह शिव की ऊर्जामय सत्ता का प्रतीक है।
2. पारद शब्द में छिपा त्रिदेवों का संकेत
‘पारद’ शब्द का प्रत्येक अक्षर एक देवता का प्रतीक है-‘प’ का अर्थ विष्णु, ‘अ’ है आदि शक्ति, ‘र’ है शिव और ‘द’ है ब्रह्मा। इस प्रकार पारद शिवलिंग में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों देवों की शक्ति समाहित मानी जाती है। यही कारण है कि पारद लिंग की पूजा करने से सभी देवताओं की कृपा एकसाथ प्राप्त होती है।
3. शिवमहापुराण में पारद लिंग की महिमा
शिवमहापुराण में स्वयं भगवान शिव ने कहा है कि करोड़ों साधारण शिवलिंगों की पूजा जितना फल देती है, उससे भी करोड़ गुना अधिक फल पारद शिवलिंग की पूजा और दर्शन मात्र से प्राप्त हो जाता है। यहाँ तक कि ब्रह्महत्या, गौहत्या जैसे महापाप भी इसके दर्शन से क्षीण हो जाते हैं। इसका केवल स्पर्श भी मोक्ष का मार्ग प्रशस्त कर देता है।
4. रावण और वाणासुर की सिद्धि का रहस्य
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण एक रससिद्ध योगी था जिसने पारद शिवलिंग की आराधना कर महादेव को प्रसन्न किया और अनेक दिव्य शक्तियाँ प्राप्त कीं। वाणासुर ने भी पारद शिवलिंग की उपासना से इच्छित वरदान पाया। यह दर्शाता है कि पारद शिवलिंग की पूजा साधक को असाधारण शक्ति और सिद्धि प्रदान कर सकती है।
5. जहां पारद लिंग की पूजा, वहां स्वयं शिव का वास
पारद शिवलिंग की विशेषता यह है कि जहां इसका विधिपूर्वक पूजन-अभिषेक होता है, वहां साक्षात भगवान शिव का निवास माना जाता है। यह सभी प्रकार के दुखों का नाश करता है और सौ अश्वमेध यज्ञों के बराबर पुण्य प्रदान करता है। यह मनुष्य को तीनों लोकों में स्थित शिवलिंगों के पूजन का फल देता है और पारलौकिक सुखों का भी मार्ग खोलता है।