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Sawan 2025: श्रावण माह 11 जुलाई से प्रारंभ, जानिए इस महीने क्यों होती है शिव पूजा फलदायी ?

Thu, 10 Jul 2025 11:35 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan 2025: सावन मास भगवान शिव को समर्पित होता है और इसी महीने में उनकी आराधना करने से भक्तों को शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुरुआत आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से होती है और यह मास श्रावण पूर्णिमा तक चलता है।
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सावन माह में शिव आराधना का महत्व - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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Sawan 2025: सनातन धर्म में वर्षभर के बारह महीनों में श्रावण मास (सावन) का विशेष धार्मिक, आध्यात्मिक और पौराणिक महत्व माना गया है। यह मास भगवान शिव को समर्पित होता है और इसी महीने में उनकी आराधना करने से भक्तों को शीघ्र फल की प्राप्ति होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण मास की शुरुआत आषाढ़ पूर्णिमा के अगले दिन से होती है और यह मास श्रावण पूर्णिमा तक चलता है। यह समय वर्षा ऋतु का होता है जब प्रकृति हरी-भरी हो जाती है और वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है।

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शिव पूजा से क्या फल मिलता है ?
भगवान शिव को त्रिदेवों में संहारक की भूमिका दी गई है, परंतु वे केवल संहारक नहीं, बल्कि सृष्टि के पालनकर्ता, योग के आदिगुरु, करुणा और ज्ञान के समुद्र भी हैं। शिव का रूप तप, वैराग्य और करुणा का प्रतीक है। वे सृष्टि के आरंभ से ही निर्गुण और सगुण रूप में पूजे जाते रहे हैं। शिव की पूजा से सभी पापों का नाश होता है, जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिलती है, रोग और शोक दूर होते हैं, और जीवन में शांति, सुख, वैवाहिक समृद्धि, संतान सुख एवं मनोकामना पूर्ति होती है।
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सावन में शिव पूजा क्यों होती है फलदायक ?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के समय जब देवता और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो चौदह रत्नों के साथ कालकूट विष भी निकला। यह विष इतना प्रचंड और घातक था कि उससे तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। तब समस्त देवताओं और ऋषियों के आग्रह पर भगवान शिव ने इस विष को अपनी कंठ में धारण किया जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें गंगाजल अर्पित किया और बेलपत्र, धतूरा, आक आदि से उनका अभिषेक किया। मान्यता है कि यह समुद्र मंथन श्रावण मास में ही हुआ था। इसलिए इस मास में शिवजी का जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण, उपवास, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत फलदायक माना गया है।

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श्रावण मास के अन्य धार्मिक पक्ष
धर्म और साधना का चातुर्मास का विशेष समय यह मास तप, उपवास, ब्रह्मचर्य और संयम का प्रतीक है। साधक इस मास में विशेष रूप से शिव पुराण, रुद्राष्टाध्यायी, शिव तांडव स्तोत्र आदि का पाठ करते हैं।

शुभ संकल्प का काल: श्रावण मास में जो भी संकल्प लेकर पूजा की जाती है, वह शीघ्र ही पूर्ण होती है। यह समय मनोकामनाओं की पूर्ति का मास है।

सावन सोमवार व्रत: महिलाएं और पुरुष सावन के सोमवार को व्रत रखकर शिवजी से उत्तम जीवनसाथी, संतान सुख, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। यह व्रत अत्यंत फलप्रद माना जाता है।

कांवड़ यात्रा का आयोजन: इस मास में लाखों शिवभक्त गंगाजल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। यह यात्रा भक्ति, त्याग और आत्मसमर्पण की प्रतीक मानी जाती है।

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