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Saraswati Puja 2019 : सरस्वती पूजन का शुभ मुहूर्त एवं राशि के अनुसार विशेष पूजन विधि

Sun, 10 Feb 2019 09:08 AM IST
रचना शर्मा पं. राजेश तिवारी, ज्योतिषविद्
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बसंत पंचमी 2019
माघ मास के शुक्लपक्ष की पंचमी तिथि को भारत के भिन्न-भिन्न प्रांतों में भिन्न-भिन्न नामों से जाना जाता हैं जिसमें मुख्य रूप से बसंत पंचमी, सरस्वती पूजा, वागीश्वरी जयंती, रति काम महोत्सव, बसंत उत्सव आदि है। मूलत: बसंत माह भारत के छह ऋतुओं में सर्वश्रेष्ठ इसलिए माना जाता है कि आज के ही दिन सृष्टि के सबसे बड़े वैज्ञानिक के रूप में जाने जाने वाले ब्रह्मदेव ने मनुष्य के कल्याण हेतु बुद्धि, ज्ञान विवेक की जननी माता सरस्वती का प्राकट्य किया था। सबसे पहले आइए जानते हैं माता सरस्वती के पूजन के लिए उपयोगी कुछ मंत्र एवं पूजन मुहूर्त के बारे में - 

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बसंत पंचमी 2019
मुहूर्त एवं पूजन विधि 
ज्ञान की देवी मां सरस्वती की पूजा तो आज पूरे दिन श्रद्धा भाव से की जा सकती है लेकिन माता सरस्वती की विशेष पूजा प्रात: 7:22 से 12:34 मिनट तक अत्यंत शुभ है। 
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बसंत पंचमी 2019
पूजन विधि 
— सर्वप्रथम प्रात: स्नान के पश्चात नवोदित सूर्य किरणों को जल दें। 
— स्नान के पश्चात् पीला, केसरिया व सफेद वस्त्र धारण करें। 
— पूजा के लिए माता सरस्वती की मूर्ति फोटो या तस्वीर ईशान कोण पर, पूर्व दिशा या उत्तर दिशा में ही रखें।
— माता सरस्वती को सफेद चंदन अथवा मलयगिरि का चंदन लगाएं। 
— देवी को सफेद एवं पीले फूल अर्पित करें। 
— परीक्षार्थीं जिनकी परीक्षाएं निकट होने वाली हों, वह अपना प्रवेश पत्र भी श्रद्धापूर्वक माता को अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त करें।

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बसंत पंचमी 2019
इन मंत्रों का करें जाप

माता सरस्वती का मंत्र
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता,
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता,
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥1॥

शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं,
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्,
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥2॥

माता सरस्वती का बीज मंत्र
ॐ ऐं ऐं ऐं महासरस्वत्यै नम: का जाप करें। 

सूर्य देवता का मंत्र
ॐ घृणि सूर्याय नम: 

भगवान विष्णु का मंत्र
ॐ पालनहाराय विष्णुवे विद्यारूपाय नम:। 

राशि के अनुसार विशेष पूजा के लिए अगली स्लाइड क्लिक करें -
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राशि
मेष 
कालपुरुष की यह प्रथम राशि है जिसके कारण ज्ञान की जननी के वाहक भगवान सूर्य स्वयं बनते हैं। अतएव मेष राशि वाले को माता सरस्वती के पूजन के पूर्व प्रात: स्नान आदि करके नवोदित सूर्य किरणों को लाल पुष्प पीला पुष्प एवं लाल चंदन जल के माध्यम से अर्पित करना चाहिए। इसके बाद प्रथम पूजा भगवान गणपति का करने के बाद माता सरस्वती के किसी भी मंत्र का आवाहन करते हुए भगवान विष्णु और भगवान शिव की आराधना करते हुए समाप्त करना चाहिए। 
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राशि
वृष 
आपकी राशि में विद्या के मूल कारक भगवन श्रीगणेश स्वयं हैं। अर्थात् बुद्धि के स्वामी ग्रह विघ्नेश्वर के रूप में जाने जाते हैं। अत: पूर्व में बताई गई पूजा विधि एवं मंत्र के अतिरिक्त आज की प्रारंभिक पूजा में श्रीगणेश को दूर्वा एवं लड्डू अवश्य अर्पित करें। 
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मिथुन
मिथुन
इस राशि के विद्या के स्वामी ग्रह शुक्र देव हैं। अत: पूर्व में बताई गई पूजा विधि एवं मंत्र के अतिरिक्त ॐ सुं शुक्रदेवाय नम: मंत्र का 108 बार जाप करना न भूलें एवं माता सरस्वती को सफेद मिष्ठान प्रसाद के रूप में अवश्य चढ़ावें। 

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राशि
कर्क 
आपके विद्या का अधिपति मंगल देव है। अत: आज के दिन निर्धारित पूजा के अतिरिक्त ॐ अंग अंगारकाय नम: मंत्र की एक माला जप अवश्य करें एवं प्रसाद के रूप में लाल लड्डू अर्पित करना न भूलें। 

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राशि
सिंह
इस राशि वाले जातकों के विद्या के मूल स्वयं बृहस्पति देव हैं। जो विद्या के कारक हैं। अत: माता सरस्वती के पूजन के बाद बृहस्पति देव का मंत्र ॐ बृं बृहस्पतये नम: की एक माला जप करें एवं पीली मिठाई प्रसाद के रूप में अवश्य चढ़ाएं। यदि संभव हो सके तो पूजन के समय पीला वस्त्र पहनना सोने पर सुहागे का काम करेगा। 

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राशि
कन्या 
इस राशि वाले जातकों के विद्या के कारक शनिदेव हैं जो कि एकाग्रता व आत्मचिंतन के मूल कारक हैं। अत: निर्धारित सरस्वती पूजा के पश्चात् शनिदेव के ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम:। की एक माला अवश्य करें। एवं पूजा के अंत में काले रंग का धागा माता सरस्वती एवं प्रभु शिव को अर्पित करते हुए शनिदेव का ध्यान कर कलाई पर बांध लें। चमत्कारिक फायदा होगा।

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राशि
तुला
इस राशि वाले जातकों के लिए भी विद्या के कारक शनिदेव हैं जो कि एकाग्रता व आत्मचिंतन के मूल कारक हैं। अत: निर्धारित सरस्वती पूजा के पश्चात शनिदेव के ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनिश्चराय नम: की एक माला अवश्य करें। एवं पूजा के अंत में काले रंग का धागा माता सरस्वती एवं प्रभु शिव को अर्पित करते हुए शनिदेव का ध्यान कर कलाई पर बांध लें। चमत्कारिक फायदा होगा।

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राशि
वृश्चिक 
इस राशि वाले जातकों के विद्या के मूल स्वयं बृहस्पति देव हैं। जो विद्या के कारक हैं। अत: माता सरस्वती के पूजन के बाद बृहस्पति देव का मंत्र ॐ बृं बृहस्पतये नम: की एक माला जप करें एवं पीली मिठाई प्रसाद के रूप में अवश्य चढ़ाएं। यदि संभव हो सके तो पूजन के समय पीला वस्त्र पहनना सोने पर सुहागे का काम करेगा

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राशि
धनु 
आपके विद्या का अधिपति मंगल देव है। अत: आज के दिन निर्धारित पूजा के अतिरिक्त ॐ अं अंगारकाय नम: मंत्र की एक माला जप अवश्य करें एवं प्रसाद के रूप में लाल लड्डू अर्पित करना न भूलें। 

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राशि
मकर 
इस राशि के विद्या के स्वामी ग्रह शुक्र देव हैं। अत: पूर्व में बताई गई पूजा विधि एवं मंत्र के अतिरिक्त ॐ सुं शुक्रदेवाय नम: मंत्र का 108 बार जाप करना न भूलें एवं माता सरस्वती को सफेद मिष्ठान प्रसाद के रूप में अवश्य चढ़ावें।

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राशि
कुंभ  
आपकी राशि में विद्या के मूल कारक भगवन श्रीगणेश स्वयं हैं। अर्थात् बुद्धि के स्वामी ग्रह विघ्नेश्वर के रूप में जाने जाते हैं। अत: पूर्व में बताई गई पूजा विधि एवं मंत्र के अतिरिक्त आज की प्रारंभिक पूजा में श्रीगणेश को दूर्वा एवं लड्डू अवश्य अर्पित करें। 
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राशि
मीन
इस राशि के जातकों के लिए विद्या के स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं। अत: निर्धारित पूजा के पश्चात् ॐ ऐं क्लीं सोमाय नम: का 108 बार जप अवश्य करें। एवं सफेद मिठाई का भोग लगने के पश्चात् पंचामृत का पान अवश्य करें। 
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