पूरे वर्ष में कुल 24 गणेश चतुर्थी होती हैं, लेकिन इनमें से चार चतुर्थियों को विशेष रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है।
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4 प्रमुख चतुर्थियों में से एक
हिंदू पंचांग के अनुसार हर महीने दो बार चतुर्थी तिथि आती है, जिनमें भगवान गणेश की विशेष पूजा और व्रत किया जाता है। इस तरह पूरे वर्ष में कुल 24 गणेश चतुर्थी होती हैं, लेकिन इनमें से चार चतुर्थियों को विशेष रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। सबसे प्रमुख चतुर्थी भाद्रपद मास की चतुर्थी होती है, जिसे भगवान गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है और इसी दिन से दस दिवसीय गणेशोत्सव की शुरुआत होती है। दूसरी महत्वपूर्ण चतुर्थी माघ मास की तिलकुटा चौथ (सकट चौथ) मानी जाती है। तीसरी खास चतुर्थी वैशाख मास की चतुर्थी है, जबकि चौथी कार्तिक मास की चतुर्थी होती है, जिस दिन सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखती हैं।
माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ या तिलकुटा चौथ कहा जाता है।
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तिलकुटा चौथ 2026
हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सकट चौथ या तिलकुटा चौथ कहा जाता है। वर्ष 2026 में तिलकुटा चौथ की चतुर्थी तिथि 6 जनवरी 2026 को सुबह 08:01 बजे से शुरू होकर 7 जनवरी 2026 को सुबह 06:52 बजे तक रहेगी। इस दिन भगवान गणेश की पूजा के लिए शाम 7:21 बजे से रात 9:03 बजे तक का समय शुभ माना गया है। पूजा के दौरान भगवान गणेश को तिल से बने लड्डुओं का भोग अर्पित करना विशेष फलदायी होता है।
वर्ष 2026 में 6 जनवरी को रात 8:54 बजे चंद्रोदय होगा।
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सकट चौथ पर चंद्रोदय और तिल का महत्व
सकट चौथ के व्रत में चंद्रमा के दर्शन का विशेष महत्व होता है। वर्ष 2026 में 6 जनवरी को रात 8:54 बजे चंद्रोदय होगा। चंद्र दर्शन के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, तिलकुटा चौथ के दिन तिल से बनी वस्तुओं का भोग लगाने से भगवान गणेश अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इस दिन तिल का सेवन और तिल का दान करना भी शुभ माना गया है। ऐसा करने से रोग, कष्ट और नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं तथा जीवन में सुख, स्वास्थ्य और समृद्धि का वास होता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।