Sakat Chauth 2026: आज सकट चौथ है। हिंदू पंचांग के अनुसार हर एक माह में दो चतुर्थी होती हैं। अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी और पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहते हैं। नारद पुराण के अनुसार माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के व्रत का बहुत महत्त्व है। इस चतुर्थी को माघी चौथ या तिल चौथ भी कहा जाता है। गणेश जी की कृपा पाने के लिए वैसे तो कोई भी इस व्रत को कर सकता है, लेकिन अधिकांश सुहागिन स्त्रियां ही इस व्रत को परिवार की सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। इस दिन भगवान गणपति की आराधना से सुख-सौभाग्य में वृद्धि तथा घर-परिवार पर आ रही विघ्न-बाधाओं से मुक्ति मिलती है। इस दिन श्री गणेशजी की पूजा-अर्चना से रुके हुए मांगलिक कार्य संपन्न होते हैं। माघ मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन चन्द्रमा के दर्शन से गणेश जी के दर्शन का पुण्य फल मिलता है। इस तिथि में गणेश जी की पूजा भालचंद्र नाम से भी की जाती है।
3 भगवान गणेश को दूर्वा अर्पित करना
5. गणेश मंत्र या व्रत कथा का पाठ
संकष्टी चतुर्थी पर “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का 108 बार जप या संकष्टी व्रत कथा का पाठ करने से संतान के जीवन से विघ्न-बाधाएं दूर होती हैं और शिक्षा व करियर में सफलता मिलती है।
6. ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान
धार्मिक शास्त्रों के अनुसार दान से पुण्य की प्राप्ति होती है। इस दिन बच्चों की भलाई के लिए ब्राह्मण या जरूरतमंद को भोजन, वस्त्र या फल दान करने से संतान का भाग्य मजबूत होता है।
7. संतान के लिए मनोकामना और आशीर्वाद
पूजन के अंत में महिलाएं भगवान गणेश से अपनी संतान के लिए स्पष्ट मनोकामना करें और उसके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दें। माना जाता है कि मां का आशीर्वाद और गणेश कृपा मिलकर संतान के जीवन को सुरक्षित और सफल बनाते हैं।
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