सनातन धर्म में सूर्यदेव को सृष्टि का साक्षात देवता माना गया है। सूर्य की ऊर्जा के कारण ही इस पृथ्वी पर जीवन संभव है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को सूर्य रथसप्तमी,आरोग्य सप्तमी या चंद्रभागा सप्तमी भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार इस दिन सूर्यदेव की उपासना करने का विधान है। मान्यता के अनुसार इसी दिन महर्षि कश्यप और देवी अदिति के गर्भ से सूर्य देव का जन्म हुआ था। रथ सप्तमी का त्योहार इस बार 28 जनवरी,शनिवार को मनाया जाएगा। वेद ,पुराण एवं योगशास्त्र में वर्णित है कि आरोग्य सुख हेतु सूर्य की उपासना सर्वथा फलदायी है।
सूर्य पूजा से लाभ
भविष्य पुराण के अनुसार जो मनुष्य रथ सप्तमी पर सूर्य की उपासना करता है उसे आरोग्य, ऐश्वर्य,धन और संतान की प्राप्ति होती है। सूर्योपनिषद के अनुसार सूर्य की किरणों में समस्त देव,गंधर्व और ऋषिगण निवास करते हैं । सूर्य की उपासना के बिना किसी का कल्याण संभव नहीं है,भले ही अमरत्व प्राप्त करने वाले देवता ही क्यों न हों। यह सप्तमी तिथि पुण्यदायिनी ,पापविनाशिनी तथा कल्याणकारी है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन गंगा नदी में स्नान या फिर घर में गंगाजल डालकर स्नान करने और भगवान सूर्य की आराधना करने से जाने-अनजाने, शरीर, वचन, मन, पिछले और वर्तमान जन्म में किए गए सभी प्रकार के पाप धुल जाते है। हिंदू धर्म के अनुसार, अगर कुंडली में सूर्य कमजोर है तो उसे नियमित रूप से सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए। यदि बार-बार प्रयास के बाद भी सफलता नहीं मिल रही हो तो सूर्यदेव की पूजा करने के साथ ही जल से अर्घ्य देना करना शुभ माना गया है।
पूजा विधि
इस दिन सूर्योदय से पूर्व उठकर पवित्र नदियों अथवा घर में ही ताज़ा जल से स्नान कर लाल,पीले,गुलाबी या नारंगी रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण करें। तांबे के लोटे में पवित्र जल लेकर जल में अष्टगंध, लाल पुष्प,अक्षत व गुड़ की डली डालकर ''ॐ घृणि सूर्याय नमः '' , इस सरल मंत्र से उदय होते सूर्य को अर्घ्य दें । अर्घ्य के बाद वहीं तीन बार परिक्रमा कर सूर्यनारायण को प्रणाम करें। इसके बाद घी या तिल के तेल का दीपक से सूर्यनारायण की आरती करें। संभव हो सके तो आदित्य हृदय स्त्रोत का पाठ भी करें। इस दिन अपाहिजों, गरीबों तथा ब्राह्मणों को अपनी सामर्थ्य के अनुसार जरूरत की वस्तुएं देनी चाहिए। आज के दिन सूर्य उपासना करने वालों के लिए एक समय नमक रहित भोजन अथवा फलाहार करने का विधान है। पापों का हरण करने वाली इस रथ सप्तमी को भगवान सूर्य के निमित्त किया गया स्नान, दान, हवन, पूजा आदि सत्कर्म हज़ार गुना फलदायक हो जाता है। यदि कोई व्यक्ति भगवान सूर्य की मानसिक पूजा भी करता है तो वह भी समस्त आदि-व्याधियों से रहित होकर सुखपूर्वक जीवन व्यतीत करता है।
इन नियमों का रखें ध्यान-
पुराणों के अनुसार सूर्यदेव की पूजा में व्रती को नीले या काले रंग के वस्त्र धारण नहीं करने चाहिए अन्यथा पूजा निष्फल हो जाती है । ज्योतिष मान्यता के अनुसार सूर्य देव को हमेशा तांबे के लोटे में ही जल चढ़ाना चाहिए। सूर्य को जल अर्पित करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि जल आपके पैरों पर न पड़ें। ध्यान रखें कि सूर्य को जल चढ़ाते समय जूते-चप्पल नहीं पहनना चाहिए।
Weekly Horoscope (30 Jan-05 Feb): सभी 12 राशियों के लिए कैसा रहेगा यह हफ्ता, किसको मिलेगा भाग्य का साथ
February Horoscope 2023: फ़रवरी महीने में किसका होगा भाग्योदय, किसे मिलेंगे शानदार मौके? पढ़ें मासिक राशिफल