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Raksha Bandhan 2026: कब है रक्षाबंधन 27 या 28 अगस्त ? जानिए तिथि, शुभ मुहूर्त और भद्रा का समय

Mon, 17 Aug 2026 06:51 PM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

Raksha Bandhan 2026: हिंदू धर्म में रक्षाबंधन एक बड़ा और प्रमुख त्योहार है ,जो हर वर्ष श्राव माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। आइए जानते हैं रक्षाबंधन से जुड़ी खास बातें...
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Raksha Bandhan 2026 - फोटो : AI
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विस्तार
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हिंदू धर्म में रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का पर्व है। इसमें बहनें अपने भाईयों की कलाई पर राखी बांधती हैं और उनकी सुख-समृद्धि और लंबी आयु की कामना करती हैं। वहीं भाई हमेशा उसकी रक्षा करने का संकल्प लेता है। इस साल रक्षाबंधन पर चंद्रग्रहण को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है रक्षाबंधन कब है। आइए जानते हैं कब है रक्षाबंधन ?

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कब है रक्षाबंधन 2026
हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष श्रावण माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 7 मिनट पर होगी और तिथि का समापन 28 अगस्त 2026 को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार, रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा। 

राखी बांधने का शुभ मुहूर्त 
हिंदू पंचांग के अुसार,28 अगस्त को राखी बांधने का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 5 बजकर 57 मिनट से लेकर सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। 

रक्षाबंधन पर भद्राकाल का साया
शास्त्रों के अनुसार रक्षाबंधन का त्योहार हमेशा भद्रा रहित काल में मनाया जाता है। क्योंकि भद्रा में राखी का त्योहार मनाना शुभ नहीं माना जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, इस वर्ष अगर भद्रा की बात करें तो 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 08 मिनट से लेकर रात 09 बजकर 32 मिनट तक भद्रा का असर रहेगा। इस तरह से रक्षाबंधन के दिन यानी 28 अगस्त को रक्षाबंधन भद्रा रहित होगी। 
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रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में कलाई में रक्षा सूत्र को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रावण पूर्णिमा तिथि पर विधि-विधान के साथ कलाई पर रक्षासूत्र बांधने से नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा होती है और जीवन में सुख-शांति का संचार होता है।  पौराणिक कथा के अनुसार जब राजा बलि ने भगवान विष्णु को वचन के रूप में पाताल लोक चलने को कहा। जिसे विष्णुजी मना नहीं कर सके। लेकिन जब लंबे समय तक श्री हरि अपने धाम नहीं लौटे तो लक्ष्मीजी को चिंता होने लगी। तब नारद मुनि ने उन्हें राजा बलि को अपना भाई बनाने की सलाह दी।अपने पति को वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी गरीब स्त्री का रूप धारण कर राजा बलि के पास पहुंच गईं और उन्हें अपना भाई बनाकर राखी बांध दी। इसके बदले उन्होंने भगवान विष्णु को पाताल लोक से ले जाने का वचन मांग लिया। उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा थी और माना जाता है कि तभी से रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाने लगा है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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