राधा अष्टमी के पावन अवसर पर राधा रानी की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन राधाजी का विधि-विधान से पूजन करने और उनकी आरती करने से भक्तों को सुख, शांति और प्रेम का आशीर्वाद प्राप्त होता है। राधा रानी को भगवान श्रीकृष्ण की परम प्रिय और प्रेम-भक्ति की स्वरूप माना जाता है। राधा अष्टमी के दिन मंदिरों और घरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और आरती का आयोजन किया जाता है। भक्त श्रद्धा भाव से राधा रानी की कथा का श्रवण करते हैं और उनके दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हैं। मान्यता है कि राधा रानी की कृपा से जीवन में प्रेम, सौभाग्य और सकारात्मकता का संचार होता है। ऐसे में इस पावन पर्व पर राधा रानी की आरती और उनकी जन्म कथा का पाठ करना विशेष फलदायी माना जाता है। आइए जानते हैं राधा रानी की आरती और उनकी जन्म से जुड़ी पौराणिक कथा।
राधा रानी की आरती
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आरती श्री वृषभानुसुता की,
मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥
त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,
विमल विवेकविराग विकासिनि ।
पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,
सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥
मुनि मन मोहन मोहन मोहनि,
मधुर मनोहर मूरति सोहनि ।
अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि,
प्रिय अति सदा सखी ललिता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥
संतत सेव्य सत मुनि जनकी,
आकर अमित दिव्यगुन गनकी ।
आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी,
अति अमूल्य सम्पति समता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥
कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि,
चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि ।
जगजननि जग दुखनिवारिणि,
आदि अनादिशक्ति विभुता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥
आरती श्री वृषभानुसुता की,
मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥
राधा अष्टमी व्रत कथा |Radha Ashtami Vrat Katha
धार्मिक मान्यताओं में वर्णित कथा के अनुसार, गोलोक धाम में श्रीकृष्ण और राधा रानी दिव्य लीलाओं में सदैव रमण करते थे। एक प्रसंग में राधा रानी किसी कारण से कुछ समय के लिए गोलोक से बाहर थीं। इसी दौरान श्रीकृष्ण अपनी सखी विरजा के साथ विहार कर रहे थे। जब यह बात राधा रानी को मालूम हुई, तो वे अत्यंत नाराज हो गईं। वे तत्काल श्रीकृष्ण के पास पहुंचीं और उनसे अपनी नाराजगी जाहिर करने लगीं। राधा रानी का क्रोधित स्वरूप देखकर श्रीकृष्ण के प्रिय सखा श्रीदामा को बहुत कष्ट हुआ। उन्हें लगा कि राधाजी प्रभु के साथ उचित व्यवहार नहीं कर रही हैं। इसी आवेश में श्रीदामा ने राधा रानी को श्राप दे दिया कि उन्हें गोलोक छोड़कर पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ेगा।
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