फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pradosh Vrat 2024: रवि प्रदोष व्रत कल, जानिए महत्व, पूजाविधि और पूजा का फल

Sat, 14 Sep 2024 03:12 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

प्रदोष की पूजा मुहूर्त के आधार पर रवि प्रदोष व्रत 15 सितंबर रविवार को रखा जाएगा। इस व्रत को रखने से विशेष रूप से सूर्यदेव और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।
 
विज्ञापन
Pradosh Vrat in june 2024 - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Pradosh Vrat 2024: हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के लिए रखा जाता है और यह हर महीने की त्रयोदशी तिथि को मनाया जाता है। जब यह व्रत रविवार के दिन पड़ता है, तो इसे ‘रवि प्रदोष व्रत’ कहा जाता है। हिंदू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद के अंतिम प्रदोष व्रत के लिए जरूरी भाद्रपद शुक्ल त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ इस साल 15 सितंबर को शाम 6 बजकर 12 मिनट से होगा यह तिथि अगले दिन 16 सितंबर को दोपहर 3 बजकर 10 मिनट पर खत्म होगी। प्रदोष की पूजा मुहूर्त के आधार पर रवि प्रदोष व्रत 15 सितंबर रविवार को रखा जाएगा। इस व्रत को रखने से विशेष रूप से सूर्यदेव और भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है। यह व्रत मानसिक शांति, शारीरिक स्वास्थ्य और जीवन में सुख-समृद्धि की प्राप्ति के लिए किया जाता है।

विज्ञापन


रवि प्रदोष व्रत का महत्व
रवि प्रदोष व्रत का आध्यात्मिक महत्व बहुत गहरा है। यह व्रत न केवल भगवान शिव की आराधना का साधन है, बल्कि सूर्य देव की उपासना भी इसके साथ जुड़ी है। सूर्य देव को स्वास्थ्य और ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। रवि प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को रखने से भगवान शिव अपने भक्तों के समस्त पापों का नाश कर उन्हें मोक्ष प्रदान करते हैं। साथ ही, इस व्रत से सूर्य ग्रह से संबंधित दोष भी दूर होते हैं और जातक की कुंडली में सूर्य ग्रह को मजबूत किया जाता है।

व्रत का फल
रवि प्रदोष व्रत का पालन करने से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और संतान सुख की प्राप्ति होती है। साथ ही, यह व्रत जीवन के कठिनाइयों और संकटों को दूर करता है और हर क्षेत्र में सफलता दिलाने में सहायक होता है। इस व्रत को करने से आर्थिक परेशानियों से छुटकारा मिलता है और घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है।
विज्ञापन


रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि
रवि प्रदोष व्रत के दिन सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करके शुद्ध वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान शिव और सूर्य देव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें। दिनभर निराहार रहें और भगवान शिव का स्मरण करते रहें। अगर निराहार रहना संभव न हो, तो फलाहार कर सकते हैं। सूर्यास्त से पहले भगवान शिव का पूजन शुरू करें। पूजन के लिए एक साफ और पवित्र स्थान पर भगवान शिव की मूर्ति या शिवलिंग स्थापित करें या मंदिर में चले जाए। पूजन के लिए शुद्ध जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से शिवलिंग का अभिषेक करें। इसके बाद बिल्वपत्र, धतूरा, पुष्प और चंदन अर्पित करें। धूप, दीप, नैवेद्य और दक्षिणा अर्पित करें। पूजा के दौरान शिव मंत्र “ॐ नमः शिवाय”का जाप करें और सूर्य देव के मंत्र “ॐ घृणि सूर्याय नमः”का जाप भी करें। इन मंत्रों के जाप से भगवान शिव और सूर्य देव की कृपा प्राप्त होती है। इस दिन व्रतधारी को किसी भी प्रकार की नकारात्मक भावनाओं से दूर रहना चाहिए।
विज्ञापन



 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें