फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pradosh Vrat 2022: प्रदोष व्रत आज, जानें महत्व, पूजा मुहूर्त, विधि और सबकुछ

Mon, 14 Feb 2022 07:46 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

14 फरवरी को पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत के दिन एक साथ कई शुभ योग का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और आयुष्मान योग का विशेष संयोग बन रहा है।
विज्ञापन
pradosh vrat 2022: प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा की प्राप्ति होती है। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Pradosh Vrat 2022 Date: हिंदू पंचांग के अनुसार आज माघ माह के शुक्ल पक्ष की त्रियोदशी तिथि है। त्रयोदशी तिथि पर प्रदोष का व्रत रखा जाता है। सोमवार के दिन पड़ने के कारण इसे सोम प्रदोष व्रत कहा जाता है। सोमवार के दिन प्रदोष व्रत होने से इसका काफी महत्व होता है। शास्त्रों में सोमवार का दिन भगवान भोलेनाथ की पूजा करने के लिए सर्वश्रेष्ठ दिन माना गया है। प्रदोष व्रत करने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इसी के साथ चंद्रमा भी अपना शुभ फल प्रदान करते हैं। सोमवार के दिन प्रदोष व्रत रखने और विधि-विधान से भगवान शिव की उपासना करने से सभी तरह की मनोकामनाओं की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं प्रदोष व्रत का महत्व, पूजा विधि , शुभ योग और मुहूर्त...

विज्ञापन


सोम प्रदोष व्रत पर बना विशेष योग
14 फरवरी को पड़ने वाला सोम प्रदोष व्रत के दिन एक साथ कई शुभ योग का विशेष संयोग बन रहा है। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग और आयुष्मान योग का विशेष संयोग बन रहा है। 14 फरवरी के दिन यानी त्रयोदशी तिथि पर सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 11 बजकर 53 मिनट से शुरू होकर अगले दिन 15 फरवरी को सुबह 07 बजे तक रहेगा। वहीं अगर इस दिन बन रहे रवि योग की बात करें तो यह दिन में 11 बजकर 53 मिनट से आरंभ हो जाएगा।  इसी के साथ आयुष्मान योग रात 09 बजकर 29 मिनट तक रहेगा फिर सौभाग्य योग और उसके बाद पुष्य नक्षत्र शुरू हो जाएगा। 

प्रदोष व्रत का महत्व 
प्रत्येक पक्ष में दो बार प्रदोष व्रत रखा जाता है। मान्यता है प्रदोष व्रत रखने से भगवान शिव की विशेष कृपा की प्राप्ति होती है। पौराणिक कथा के अनुसार सबसे पहले प्रदोष व्रत चंद्रदेव ने रखना प्रारंभ किया था। मान्यता है कि भगवान शिव के शाप को कारण चंद्रमा को क्षय रोग हो गया था। तब इस शाप से मुक्ति पाने के लिए चंद्रदेव ने हर महीने आने वाले त्रयोदशी तिथि पर भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए प्रदोष व्रत रखना आरंभ कर दिया था। इस व्रत को करने से भगवान शिव चंद्रदेव पर प्रसन्न होकर उन्हें क्षय रोग से मुक्ति मिल थी। मान्यता है कि भगवान शिव और माता पार्वती प्रदोष व्रत रखने वालों की हर मनोकामना की पूर्ति करते हैं।
विज्ञापन


प्रदोष व्रत पूजा विधि

  • त्रयोदशी तिथि को प्रातः उठकर स्नानादि करके दीपक प्रज्वलित करके व्रत का संकल्प लेते हैं।
  • पूरे दिन व्रत करने के बाद प्रदोष काल में किसी मंदिर में जाकर पूजन करना चाहिए।
  • यदि मंदिर नहीं जा सकते तो घर के पूजा स्थल या स्वच्छ स्थान पर शिवलिंग स्थापित करके पूजन करना चाहिए
  • शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, घी व गंगाजल से अभिषेक करना चाहिए।
  • धूप-दीप फल-फूल, नैवेद्य आदि से विधिवत् पूजन करना चाहिए।
  • पूजन और अभिषेक के दौरान शिव जी के पंचाक्षरी मंत्र नमः शिवाय का जाप करते रहें।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें