हिंदू पंचाग के अनुसार साल के दसवें महीने को पौष मास कहा जाता है। पौष मास की पूर्णिमा को चंद्रमा पुष्य नक्षत्र में रहता है इसलिये इस मास को पौष का मास कहा जाता है। पौष मास का आरंभ 20 दिसंबर यानि आज से हो गया है। पौष मास में सूयदेव की आराधना का विशेष महत्व है। मान्यता है कि सूर्य देवता के भग नाम से इस माह में उनकी पूजा करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं एक मान्यता यह भी है कि इस मास में मांगलिक कार्य नहीं करने चाहिये क्योंकि उनका शुभ फल नहीं मिलता। मान्यता है कि लोग सांसारिक कार्यों की बजाय धर्म-कर्म में रूचि लें इसी कारण इस सौर धनु मास को खर मास की संज्ञा ऋषि-मुनियों ने दी।
पौष मास में सूर्योपासना का महत्व
पौष मास में सूर्योपासना का महत्व है। पौराणिक मान्यता के अनुसार पौष मास में सूर्य देव की उपासना उनके भग नाम से करनी चाहिए। पौष मास में सूर्यदेव को अर्ध्य देने व इनका उपवास रखने का विशेष महत्व है। मान्यता है कि इस मास प्रत्येक रविवार व्रत व उपवास रखने और तिल चावल की खिचड़ी का भोग लगाने से मनुष्य तेजस्वी बनता है। पौष मास धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इस मास में बहुत ही महत्वपूर्ण व्रत व त्यौहार पड़ते हैं ।आइए जानते हैं पौष मास में पड़ने वाले व्रत और त्योहार के बारे में-
पौष मास के व्रत एवं त्योहार
22 दिसंबर-संकष्टी चतुर्थी,
25 दिसंबर- क्रिसमस डे,
26 दिसंबर-भानु सप्तमी,
30 दिसंबर- सफला एकादशी,
31 दिसंबर- शुक्र प्रदोष व्रत,
एक जनवरी- मासिक शिवरात्रि,
दो जनवरी- पौष अमावस्या,
छह जनवरी- विनायक चतुर्थी,
नौ जनवरी- गुरु गोविंद सिंह जयंती,
12 जनवरी- स्वामी विवेकानंद जयंती,
13 जनवरी- पौष पुत्रदा एकादशी, वैकुंठ एकादशी,
14 जनवरी- मकर संक्रांति, लोहड़ी, पोंगल, सूर्य का उत्तरायण, खरमास का समापन,
15 जनवरी- शनि प्रदोष व्रत,
17 जनवरी पौष पूर्णिमा।