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कब है पापांकुशा एकादशी 21 या 22 अक्तूबर ? जानिए तिथि, महत्व और पूजा का शुभ मुहूर्त

Tue, 20 Oct 2026 05:32 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हिंदू धर्म में पापांकुशा एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की पूजा करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त। 
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कब है पापांकुशा एकादशी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिंदू धर्म में हर माह आने वाले एकादशी का विशेष महत्व होता है। आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह एकादशी दशहरे के बाद आती है। एकादशी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा का विशेष विधान होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्ण की पूजा-पाठ और आरती करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत, दान-पुण्य और भगवान विष्णु का नाम और मंत्रों का स्मरण करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए जानते हैं इस बार पापांकुशा एकादशी कब रखा जाएगा और इसका महत्व। 
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पापांकुशा एकादशी तिथि 2026
वैदिक पंचांग के अनुसार, आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरुआत 21 अक्तूबर 2026 को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट से होगी और इसका समापन 22 अक्तूबर को दोपहर 2 बजकर 47 मिनट पर होगा। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर पापांकुशा एकादशी का व्रत 22 अक्तूबर को रखा जाएगा। 

पापांकुशा एकादशी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त 
पंचांग के अनुसार, 22 अक्तूबर को पापांकुशा पर पूजा के लिए अभिजीत मुहूर्त विशेष रूप शुभ रहेगा। पूजा के लिए यह मुहूर्त सुबह 11 बजकर 43 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। इस मुहूर्त में भगवान विष्णु की पूजा करना फलदायी रहेगा। 
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पापांकुशा एकादशी का महत्व 
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पापांकुशा एकादशी के दिन व्रत रखने, भगवान विष्णु की पूजा करने और दान-पुण्य करने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है। पापांकुशा एकादशी पर व्रत करने के जीवन में सुख-समृद्धि और संपन्नता आती है। इस दिन भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी की पूजा करने, विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करने और दान करना शुभफलदायी होता है। पापांकुशा एकादशी पर गरुड़ पर विराजमान भगवान विष्णु के पद्मनाभ स्वरूप की पूजा की जाती है। प्रातःकाल स्नान करके व्रत का संकल्प लें और भगवान को चंदन, अक्षत, मोली, पुष्प, फल तथा मेवा अर्पित करें। इसके साथ ही 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' मंत्र का जप करना और धूप-दीप से भगवान की आरती करना अति शुभकारी माना जाता है।
 

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 


 
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