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Navratri 2024: नवरात्रि के पहले दिन क्यों बोए जाते हैं 'जौ' जानिए पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं

Wed, 25 Sep 2024 04:34 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के साथ ही जौ बोने की परंपरा होती है, जिसे "कलश स्थापना" के साथ ही आरंभ किया जाता है। इस परंपरा के पीछे पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं जो जीवन में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।
 
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navratri 2024 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Navratri 2024: सनातन धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व देवी दुर्गा के नौ रूपों की उपासना का समय होता है, जिसमें साधक मां दुर्गा से शक्ति, साहस और समृद्धि की कामना करते हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन घटस्थापना के साथ ही जौ बोने की परंपरा होती है, जिसे "कलश स्थापना" के साथ ही आरंभ किया जाता है। इस परंपरा के पीछे पौराणिक और धार्मिक मान्यताएं जुड़ी हुई हैं जो जीवन में सुख, समृद्धि और धन-धान्य की प्राप्ति का प्रतीक मानी जाती हैं।

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पौराणिक मान्यता
पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब पृथ्वी पर असुरों का अत्याचार बढ़ने लगा था, तब देवी दुर्गा ने दैत्यों का संहार कर मानव जाति की रक्षा की। इस संघर्ष के दौरान पृथ्वी पर अकाल और सूखा पड़ गया था। देवी के द्वारा दैत्यों के संहार के बाद जब पृथ्वी पुनः हरी-भरी हुई, तब सबसे पहले जौ उगे। इसलिए जौ को समृद्धि और उर्वरता का प्रतीक माना जाता है।एक अन्य मान्यता के अनुसार, जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की तब वनस्पतियों में जो फसल सबसे पहले विकसित हुई थी वो थी ‘जौ’। इसीलिए नवरात्रि के पहले दिन घट स्थापना के समय जौ की सबसे पहले पूजा की जाती है और उसे कलश में भी स्थापित किया जाता है।  नवरात्रि के समय जौ बोने की परंपरा धरती पर पुनः जीवन और संपन्नता का संदेश देती है।

धार्मिक मान्यताएं
धार्मिक दृष्टिकोण से, जौ को अन्न का प्रथम रूप माना गया है। जौ को बोने की परंपरा यह संकेत देती है कि यदि नवरात्रि के दौरान जौ के अंकुर सही रूप से विकसित होते हैं, तो वर्ष भर घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली बनी रहेगी। जौ के बीजों का बढ़ना या न बढ़ना, आने वाले समय में घर में आर्थिक स्थिरता, स्वास्थ्य और संपन्नता की स्थिति का संकेत माना जाता है। इसे भविष्य में होने वाली फसल की अच्छी उपज का भी प्रतीक माना जाता है।
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जौ बोने की विधि
नवरात्रि के प्रथम दिन कलश स्थापना के बाद एक मिट्टी के पात्र में शुद्ध मिट्टी डालकर उसमें जौ के बीज बोए जाते हैं। इस पात्र को देवी के समक्ष स्थापित किया जाता है और प्रतिदिन इसे जल अर्पित किया जाता है। जौ के बीजों का उगना जीवन में नई ऊर्जा, उन्नति और शुभता का प्रतीक होता है। जौ का जितना तेजी से और अच्छी तरह से अंकुरण होता है, उसे घर-परिवार के लिए उतना ही शुभ माना जाता है। नवरात्रि के इस अनुष्ठान को हर घर में शुभता, समृद्धि और उन्नति की प्राप्ति के लिए किया जाता है, जिससे व्यक्ति अपने जीवन में नई शुरुआत कर सके।
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