मां महागौरी की पूजा का महत्व
मां महागौरी को अन्नपूर्णा का स्वरूप माना जाता है। ये भक्तों के लिए धन, वैभव और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री देवी हैं। इनकी कृपा से भक्तों के सभी कष्ट शीघ्र ही दूर हो जाते हैं। भक्त जब भी इनका स्मरण और ध्यान करते हैं तो वे असंभव कार्यों को भी संभव बना पाते हैं। मां महागौरी की उपासना मनुष्य की वृत्तियों को सत की ओर प्रेरित करती है और असत का विनाश करती है।
ऐसे पड़ा नाम महागौरी
पुराणों के अनुसार, पार्वती जी ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी उल्लेख किया है कि देवी ने अत्यंत कठिन संकल्प लिया था
“जन्म कोटि लगि रैगर हमारी, बरउँ संभु न त रहउँ कुंआरी।”
इस तपस्या के कारण उनका शरीर एकदम काला हो गया। भगवान शिव उनकी तपस्या से प्रसन्न हुए और गंगाजी के पवित्र जल से उनका शरीर स्नान कराया। जल के स्पर्श से देवी का शरीर गौरवर्ण और अत्यंत कांतिमान हो गया। तभी से इन्हें महागौरी नाम से जाना जाने लगा।
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पूजा का फल
मां महागौरी की उपासना से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और उपासक अक्षय पुण्य का अधिकारी बनता है। पूर्व जन्मों के पाप भी धुल जाते हैं और भविष्य में दुख-दैन्य का प्रभाव नहीं रहता। भक्त को पवित्रता और दिव्यता का अनुभव होता है। कहा जाता है कि महागौरी की आराधना से जीवन में आलौकिक सिद्धियाँ और विशेष शक्तियाँ प्राप्त होती हैं।
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धन-धान्य और सुख-समृद्धि की अधिष्ठात्री
महागौरी देवी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली देवी कहा गया है। जो भक्त श्रद्धा और भक्ति से इनकी पूजा करता है, उसके घर में सदैव सुख, शांति और सौभाग्य का वास होता है। इसी कारण अष्टमी के दिन कन्या पूजन का विशेष विधान है। कन्याएं देवी स्वरूप मानी जाती हैं और उन्हें भोजन कराना मां महागौरी को अर्पित करना ही माना जाता है।
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मां महागौरी की पूजन विधि
अष्टमी तिथि के दिन प्रातः स्नान-ध्यान करके कलश पूजन करें और फिर मां महागौरी की विधिपूर्वक पूजा करें। इस दिन मां को सफेद पुष्प अर्पित करना अत्यंत शुभ होता है। मां को हलुआ, पूरी, सब्जी, काले चने और नारियल का भोग लगाया जाता है। पूजन के समय माता को चुनरी अर्पित करें और वंदना मंत्र का उच्चारण करें।
वंदना मंत्र
श्वेते वृषे समरूढा श्वेताम्बराधरा शुचिः।
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा।।