नवरात्रि के अष्टमी और नवमी तिथि पर कन्या पूजन का विशेष महत्व होता है। 10 अक्टूबर से शुरू हुए नवरात्रि की अष्टमी 17 अक्टूबर को है। अष्टमी तिथि पर मां दुर्गा के आठवें रूप यानी महागौरी की पूजा की जाती है। सुबह- सुबह महागौरी की पूजा के बाद घर में नौ कन्याओं और एक बालक को भोजन कराया जाता है।
कन्या पूजन की शुभ-मुहूर्त
16 अक्तूबर मंगलवार को सुबह 10 बजकर 17 मिनट तक सप्तमी रहेगी और फिर अष्टमी लग जाएगी जो बुधवार दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगी। इसके बाद नवमी वीरवार की दोपहर 3 बजकर 30 मिनट तक रहेगी। 17 अक्तूबर बुधवार को श्री दुर्गाष्टमी है और इस दिन महागौरी के अतिरिक्त भद्रकाली तथा सरस्वती पूजन भी किया जाता है। कुछ लोग अपनी आस्था अनुसार अष्टमी के दिन कन्या पूजन करते हैं और कुछ नवमी के दिन। कन्या पूजन का शुभ समय सूर्योदय से दोपहर 12 बजकर 50 मिनट तक रहेगा।
कन्या पूजन में उम्र का महत्व
- एक कन्या की पूजा से ऐश्वर्य की प्राप्त होती है।
- दो कन्याओं की पूजा से भोग और मोक्ष साथ साथ मिलते हैं।
- तीन कन्याओं के पूजन से धर्म के साथ साथ अर्थ व काम की भी प्राप्ति होती है।
- चार कन्याओं की पूजा से राजयोग मिलता है।
- पांच कन्याओं के पूजन से विद्या धन की प्राप्ति होती है।
- छह कन्याओं का पूजन छह तरह की सिद्धि मिलती है।
- सात कन्याओं का पूजन राज्य में राज का सुख मिलता है।
- आठ कन्याओं के पूजन से संपूर्ण संपदा की प्राप्ति होती है।
- नौ कन्याओं के पूजन से धरती के प्रभुत्व की प्राप्ति होती है।