फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

'नारायण-नारायण' की गूंज वाले देवर्षि नारद की जयंती आज, जानिए पौराणिक मान्यता,पूजनविधि और महत्व

Tue, 13 May 2025 05:51 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Narada Jayanti 2025: नारद जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2025 में यह पर्व 13 मई को मनाया जाएगा। यह दिन नारद मुनि की स्मृति में भक्ति, संवाद और धर्म के प्रचार के संकल्प के साथ मनाया जाता है।
 
विज्ञापन
Narada Jayanti 2025 - फोटो : adobe
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Narada Jayanti 2025: धर्मशास्त्रों में नारद मुनि को एक दिव्य ऋषि और ब्रह्मा जी के मानस पुत्र के रूप में वर्णित किया गया है। उन्हें 'देवर्षि' की उपाधि प्राप्त है। वे तीनों लोकों में विचरण करते हैं और देवताओं, असुरों, ऋषियों व मानवों के बीच संवाद का माध्यम बनते हैं। नारद जी के हाथों में वीणा और मुख पर हर समय "नारायण-नारायण" का मधुर उच्चारण रहता है। वे विष्णु भगवान के अनन्य भक्त माने जाते हैं और उन्हीं के गुणगान में लीन रहते हैं।
विज्ञापन


पौराणिक प्रसंगों में भूमिका
नारद मुनि का नाम महाभारत, रामायण, भागवत, शिवपुराण जैसे अनेक ग्रंथों में आता है। वाल्मीकि रामायण के अनुसार, जब वाल्मीकि जी के मन में यह प्रश्न उठा कि कौन व्यक्ति इस पृथ्वी पर मर्यादा का पालन करने वाला, धर्मपरायण और सर्वगुणसम्पन्न है तब नारद मुनि ने ही उन्हें श्रीराम की कथा सुनाई, जिससे प्रेरित होकर रामायण की रचना हुई।

भागवत पुराण में उल्लेख है कि नारद मुनि एक बार अपनी पूर्व जन्म की कथा बताते हैं वे एक दासीपुत्र थे और बचपन में ऋषियों की सेवा कर उन्हें साधु-संगति का लाभ मिला। इसी प्रभाव से उनका चित्त भगवान विष्णु की भक्ति में रम गया। मृत्यु के बाद वे विष्णुलोक गए और अगले जन्म में देवर्षि नारद के रूप में प्रकट हुए।
विज्ञापन


नारद जयंती कब मनाई जाती है?
नारद जयंती हर वर्ष ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मनाई जाती है। वर्ष 2025 में यह पर्व 13 मई को मनाया जाएगा। यह दिन नारद मुनि की स्मृति में भक्ति, संवाद और धर्म के प्रचार के संकल्प के साथ मनाया जाता है।

नारद जयंती का महत्व
नारद मुनि को संवाद, संचार और लोककल्याणकारी भक्ति का प्रतीक माना जाता है। वे न केवल दिव्य घटनाओं को जोड़ने वाले सूत्रधार हैं, बल्कि भक्ति मार्ग के सबसे सशक्त प्रचारक भी हैं। यही कारण है कि नारद जयंती पत्रकारों, वक्ताओं, संगीत प्रेमियों और भक्ति मार्ग के साधकों के लिए एक प्रेरणादायक पर्व है।

Panchang 13 May: ज्येष्ठ माह कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि, दिन का शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

पूजा विधि
इस दिन प्रातः स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करने के बाद पूजा स्थान को स्वच्छ कर नारद मुनि की प्रतिमा या चित्र स्थापित किया जाता है। धूप, दीप, चंदन, पुष्प, माला, फल, नैवेद्य आदि अर्पित किए जाते हैं। ‘ॐ नारदाय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करना पुण्यदायक माना गया है। नारद भक्ति सूत्र, विष्णु सहस्रनाम या नारायण स्तोत्र का पाठ किया जाता है। चूंकि नारद जी को संगीत और भजन प्रिय हैं, अतः इस दिन घरों और मंदिरों में भजन-कीर्तन करना अत्यंत शुभ होता है। पूजा के अंत में प्रसाद वितरण कर सबके कल्याण की कामना की जाती है।
विज्ञापन



 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें