मौना पंचमी व्रत का महत्व
धार्मिक मान्यता के अनुसार, मौना पंचमी के दिन शिव के दक्षिणामूर्ति स्वरूप की पूजा महत्व होता है। इस रूप में शिव को ज्ञान, ध्यान, योग और विद्या का जगद्गुरु माना जाता है। इस दिन दक्षिणामूर्ति स्वरूप शिव की पूजा से बुद्धि तथा ज्ञान में बढ़ोतरी होती है तथा मनुष्य हर तरफ से जीवन में सफलता पाता है। इस दिन पंचामृत और जल से शिवजी का अभिषेक किया जाता है। मौना पंचमी के दिन शेषनाग को सूखे फल, खीर आदि अर्पित किए जाते हैं।
शिव पूजा में इन बातों का रखें विशेष ध्यान
शिवजी की पूजा में केतकी के फूलों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। कहा जाता है कि केतकी के फूल चढ़ाने से भगवान शिवजी नाराज होते हैं। इसके अलावा, तुलसी को कभी भी भगवान शिवजी को अर्पित नहीं किया जाता है। साथ ही शिवलिंग पर कभी भी नारियल का पानी नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान शिवजी को हमेशा कांस्य और पीतल के बर्तन से जल चढ़ाना चाहिए।