महत्वपूर्ण अमावस्या तिथि और मुहूर्त
मार्गशीर्ष अमावस्या की तिथि 30 नवंबर को सुबह 10:29 बजे शुरू होगी और इसका समापन 1 दिसंबर को सुबह 11:50 बजे होगा। अमावस्या के दिन सूर्योदय सुबह 6:57 बजे और सूर्यास्त शाम 5:24 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार 1 दिसंबर को ही मार्गशीर्ष अमावस्या मनाई जाएगी। इस दिन आप कुछ विशेष उपाय करके अपने पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
पितरों को प्रसन्न करने के उपाय:
1. अन्न दान
अमावस्या के दिन दान का अधिक महत्व बताया गया है। ऐसे में आप इस दिन अन्न दान कर सकते हैं। इससे पितरों की कृपा प्राप्त होती है। दरअसल अन्न दान को सबसे महान दान माना गया है। इसमें दो तरह के दान किए जा सकते हैं। जैसे-
कच्चा अन्न दान- तर्पण के बाद चावल, दाल, गेहूं आदि दान करें।
भोजन का दान- सात्विक भोजन बनाकर गाय, कौआ, या कुत्ते को खिलाएं। इसे पंचबलि कर्म कहा जाता है। गरुड़ पुराण के अनुसार, इन जीवों के माध्यम से अन्न पितरों तक पहुंचता है।
2. दीप दान
शाम के समय मिट्टी का दीपक जलाकर उसमें सरसों का तेल डालें और इसे दक्षिण दिशा में रख दें। माना जाता है कि दीपक की रोशनी से पितरों का मार्ग प्रकाशित होता है, जिससे वे प्रसन्न होकर आशीर्वाद देते हैं।
3. गो सेवा और तुलसी पूजा
अमावस्या के दिन गाय की सेवा और तुलसी की पूजा करें। इससे न केवल पितरों को संतुष्ट मिलती है, बल्कि यह परिवार में सुख, समृद्धि और धन की वृद्धि भी करता है।
4. गरुड़ पुराण का पाठ
यदि परिवार में पितृ दोष है, तो अमावस्या के दिन गरुड़ पुराण का पाठ जरूर करें। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है, और वे भगवान विष्णु की कृपा से मोक्ष प्राप्त करते हैं। इन उपायों को करके पितरों की कृपा प्राप्त की जा सकती है, जिससे परिवार में सुख-शांति और उन्नति होती है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।