फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पूजा विधि और स्नान शुभ मुहूर्त, जानिए दान का महत्व

Tue, 14 Jan 2025 07:41 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Makar Sankranti 2025: मकर संक्राति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं जिस कारण से इसे उत्तरायण पर्व भी कहते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, सूर्यदेव की विशेष पूजा का विशेष महत्व होता है।
विज्ञापन
Makar Sankranti 2025:  मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, सूर्यदेव की विशेष पूजा का विशेष महत्व होता है। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Makar Sankranti 2025: आज मकर संक्रांति का पावन पर्व है। तीर्थराज प्रयागराज में मकर संक्रांति पर साधु-संत और गृहस्थ जीवन जीने वाले लोग गंगा, यमुना, त्रिवेणी, नर्मदा और शिप्रा जैसी अन्य पवित्र नदियों में स्नान करके पुण्य लाभ की प्राप्ति करते हैं। हिंदू धर्म में मकर संक्रांति के त्योहार का विशेष महत्व होता है। प्रत्येक साल यह त्योहार पौष महीने में मनाया जाता है। लेकिन इस बार मकर संक्रांति पौष माह के खत्म होने के बाद मनाई जा रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार इस सूर्य धनु राशि की अपनी यात्रा को विराम देकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं। जिसे मकर संक्रांति के नाम से जाना जाता है। मकर संक्राति पर सूर्यदेव दक्षिणायन से उत्तरायण होते हैं जिस कारण से इसे उत्तरायण पर्व भी कहते हैं। इसके अलावा मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से जाना जाता है। मकर संक्रांति पर गंगा स्नान, सूर्यदेव की विशेष पूजा का विशेष महत्व होता है। इसके अलावा इस दिन दान करने का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति का महत्व, पूजा विधि और स्नान का शुभ मुहूर्त।

विज्ञापन


मकर संक्रांति 2025 तिथि
पंचांग के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व मंगलवार, 14 जनवरी को है। सूर्यदेव इस दिन धनु से मकर राशि में सुबह 09 बजकर 3 मिनट पर प्रवेश करेंगे। इस कारण से मकर संक्रांति 14 जनवरी को है। 

Makar Sankranti 2025: 19 साल बाद मकर संक्रांति पर बन रहा है ऐसा दुर्लभ संयोग, जानें पुण्य काल का समय
विज्ञापन


मकर संक्रांति पुण्य काल मुहूर्त 
इस वर्ष मकर संक्रांति पर पुण्य काल मुहूर्त 14 जनवरी 2025 को सुबह 08 बजकर 40 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। पुण्य काल के मुहूर्त में गंगा स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। 



महापुण्य काल मुहूर्त 
मकर संक्रांति पर महापुण्य काल का मुहूर्त सुबह 08 बजकर 40 मिनट से 09 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। 

Makar Sankranti Puja Vidhi: मकर संक्रांति पर इस विधि से करें सूर्य उपासना, मिलेंगे शुभ फल

मकर संक्रांति 2025 में दान और स्नान का मुहूर्त
मकर संक्रांति पर स्नान और दान करने का विशेष महत्व होता है। इस दिन बिना गंगा स्नान और दान के मकर संक्रांति का पूरा लाभ नहीं मिल पाता है। मकर संक्रांति पर सुबह-सुबह स्नान करने के विशेष महत्व होता है। 14 जनवरी को मकर संक्रांति पर गंगा स्नान के लिए शुभ मुहूर्त सुबह 09 बजकर 03 मिनट से लेकर सुबह 10 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। पवित्र नदी में मकर संक्रांति के दिन स्नान करने के बाद सूर्यदेव को जल अर्पित करने और तिल का दान करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। 
विज्ञापन


Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर इन देवताओं को अर्पित करें खिचड़ी, पूरी होगी हर मनोकामना

मकर संक्रांति पूजा विधि
मकर संक्रांति का पर्व हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इस त्योहार के देशभर के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। मकर संक्रांति पर सूर्यदेव की विधि-विधान के साथ पूजा करने का महत्व होता है। मकर संक्रांति के दिन सुबह जल्दी उठकर घर के साफ-सफाई करने के बाद घर के पास किसी पवित्र नदी में स्नान करने जाएं और वहां पर स्नान करने के बाद सूर्य देव अर्घ्य दें। फिर सूर्यदेव से जुड़े मंत्रों का जाप करें और दान-दक्षिणा करें।  

Makar Sankranti 2025: मकर संक्रांति पर करें इन 5 मंत्रों का जाप, सूर्य देव प्रसन्न होकर दूर करेंगे हर समस्या

मकर संक्रांति पर प्रयागराज के त्रिवेणी में स्नान का महत्व
 सूर्य के मकर राशि में प्रवेश काल के समय जब सभी देवों के दिन का शुभारंभ होता है तो तीनों लोकों में प्रतिष्ठित गंगा, यमुना और सरस्वती के पावन संगमतट 'त्रिवेणी' पर साठ हजार तीर्थ और साठ करोड़ नदियाँ, सभी देवी-देवता, यक्ष, गन्धर्व, नाग, किन्नर आदि तीर्थराज प्रयाग' में एकत्रित होकर गंगा-यमुना-सरस्वती के पावन संगम तट पर स्नान, जप-तप और दान-पुण्य कर अपना जीवन धन्य करते हैं। तभी इसे तीर्थों का कुंभ भी कहा जाता है। 

Mahakumbh 2025: किस दिन है महाकुंभ का पहला शाही स्नान, कैसे पड़ा इसका नाम? जानें इसका धार्मिक महत्व

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें