15 जनवरी 2020 को मकर संक्रांति का पर्व मनाया जाएगा। हिंदू धर्म इस पर्व का विशेष महत्व बहुत है। मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है जिसे अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। आइए जानते हैं मकर संक्रांति का महत्व और मान्यताएं...
1- सूर्य का मकर राशि में प्रवेश
मकर संक्रांति पर सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है। इसी कारण से इस त्योहार को मकर संक्रांति कहा जाता है।
2- उत्तरायण
मकर संक्रान्ति के पर्व को उत्तरायण भी कहा जाता है। दरअसल मकर संक्रांति से सूर्य दक्षिणायन से उत्तरायण दिशा में चलने लगते हैं। भारतीय संस्कृति में सूर्य के दक्षिणायन को नकारात्मकता तथा उत्तरायण को सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इस दिन जप, तप और दान का विशेष महत्व होता है।
3- सूर्य और शनि का मिलन मकर संक्रांति पर ही
मकर संक्रांति के ही दिन सूर्य अपने पुत्र शनि से उनके लोक जाते हैं। शनि मकर राशि के स्वामी होते हैं। इसी कारण से इसे मकर संक्रांति कहा जाता है।
4- मकर संक्रांति और गंगा
मकर संक्रांति के दिन भागीरथ की तपस्या से मां गंगा पृथ्वी में आकर सागर में मिली थीं।
5- मकर संक्रांति और भीष्म का देह त्याग
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भीष्म पितामह ने प्राण त्यागने के लिए मकर संक्रांति के दिन का ही चयन किया था। मकर संक्रांति के दिन देह त्यागने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
6- मकर संक्रांति और पोंगल
दक्षिण भारत में इस त्योहार को पोंगल के रूप में मनाया जाता है। पोंगल का त्योहार भी फसल और किसानों का त्योहार होता है। पोंगल का अर्थ होता है उबालना। गुड़ और चावल उबालकर सूर्य को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद का नाम ही पोंगल है।
8- मकर संक्रांति और लोहड़ी
मकर संक्रान्ति के एक दिन पहले लोहड़ी का त्योहार मनाया जाता है। पंजाब और हरियाणा में लोहड़ी का त्योहार धूम-धाम से मनाया जाता है।
9- मकर संक्रांति और खिचड़ी
उत्तर प्रदेश में मकर संक्रांति को खिचड़ी के नाम से भी जाना जाता है तथा इस दिन खिचड़ी खाने एवं खिचड़ी दान देने की परंपरा है।
10 मकर संक्रांति और पतंगबाजी
मध्य भारत में मकर संक्रांति को संक्रांति के नाम से जाना जाता है। इस दिन यहां पर पतंगबाजी है।