फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mahashivratri 2024: क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? जानिए इससे जुड़ी तीन पौराणिक कथाएं

Fri, 08 Mar 2024 09:38 AM IST
आशिकी पटेल धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
क्यों मनाई जाती है महाशिवरात्रि? - फोटो : Amar Ujala
विज्ञापन

Mahashivratri 2024: 8 मार्च को महाशविरात्रि है। भारत में महाशिवरात्रि का पावन पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं, मंदिर जाकर भगवान शिव को फल-फूल अर्पित करते हैं और शिवलिंग पर दूध व जल अर्पित करते हैं। महाशिवरात्रि के दिन देशभर के सभी शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है। इस दिन भोलेनाथ के दर्शन करके और शिवलिंग का अभिषेक करके लोग अपने आप को धन्य मानते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है? ऐसे में आइए जानते हैं कि महाशिवरात्रि मनाने के पीछे क्या मान्यता है...  

विज्ञापन


Mahashivratri 2024: भोले बाबा को प्रिय हैं ये चीजें, महाशिवरात्रि पर जरूर लगाएं इनका भोग

महाशिवरात्रि मनाए जाने के संबंध में कई कथाएं प्रचलित हैं। भागवत पुराण के अनुसार समुद्र मंथन के समय वासुकी नाग के मुख में भयंकर विष की ज्वालाएं उठीं और वे समुद्र में मिश्रित होकर विष के रूप में प्रकट हो गई। विष की यह आग की ज्वालाएं पूरे आकाश में फैलकर सारे जगत को जलाने लगींं। इसके बाद सभी देवता, ऋषि-मुनि शिवजी के पास मदद के लिए गए। इसके बाद भगवान शिव ने उस विष को पी लिया। इसके बाद से ही उन्हें नीलकंठ कहा जाने लगा। शिव द्वारा इस बड़ी विपदा को झेलने और विष की शांति के लिए उस चंद्रमा की चांदनी में सभी देवों ने रात भर शिव का गुणगान किया। वह महान रात्रि ही शिवरात्रि के नाम से जानी गई। 
विज्ञापन


एक अन्य मान्यता के अनुसार एक बार ब्रह्मा और विष्णु दोनों में इस बात को लेकर विवाद हो गया कि दोनों में से बड़ा कौन है। स्थिति यह हो गई कि दोनों ही भगवान ने अपनी दिव्य अस्त्र शस्त्रों का इस्तेमाल कर युद्ध घोषित कर दिया। इसके बाद चारों ओर हाहाकार मच गया। देवताओं, ऋषि मुनियों के अनुरोध पर भगवान शिव इस विवाद को खत्म करने के लिए ज्योतिर्लिंग रूप में प्रकट हुए। इस लिंग का न कोई आदि था और न ही अंत था। ब्रह्मा विष्णु दोनों ही इस लिंग को देखकर यह नहीं समझ पाए कि यह क्या चीज है। इसके बाद भगवान विष्णु सूकर का रूप धारण कर नीचे की ओर उतरे जबकि ब्रह्मा हंस का रूप धारण कर ऊपर की ओर यह जानने के लिए उड़े कि इस लिंग का आरंभ कहां से हुआ है और इसका अंत कहां है। 

जब दोनों को ही सफलता नहीं मिली तब दोनों ने ज्योतिर्लिंग को प्रणाम किया। इसी दौरान उसमें से ऊं की ध्वनि सुनाई दी। ब्रह्मा विष्णु दोनों ही आश्चर्यचकित हो गए। इसके बाद उन्होंने देखा कि लिंग के दाहिने ओर आकार, बायीं ओर उकार और बीच में मकार है। अकार सूर्यमंडल की तरह, उकार अग्नि की तरह तथा मकार चंद्रमा की तरह चमक रहा था और उन तीन कार्यों पर शुद्ध स्फटिक की तरह भगवान शिव को देखा। इस अद्भुत दृश्य को देख ब्रह्मा और विष्णु अति प्रसन्न हो शिव की स्तुति करने लगे। शिव ने प्रसन्न हो दोनों को अचल भक्ति का वरदान दिया। प्रथम बार शिव के ज्योतिर्लिंग में प्रकट होने पर इसे महाशिवरात्रि के रूप में मनाया गया। 

MahaShivratri 2024: महाशिवरात्रि पर करें इन मंत्रों का जाप, महादेव हर मनोकामना करेंगे पूरी

वहीं एक अन्य कथा के अनुसार महाशिवरात्रि पर भगवान शिव और देवी पार्वती का मिलन हुआ था। फाल्गुन चतुर्दशी तिथि पर भगवान शिव ने वैराग्य त्याग कर देवी पार्वती संग विवाह किया था और गृहस्थ जीवन में प्रवेश किया था। इसी वजह से हर वर्ष फाल्गुन चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की खुशी में महाशिवरात्रि का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन शिवभक्त कई स्थानों पर महाशिवरात्रि पर शिव जी की बारात निकालते हैं।  

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें