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श्रावण मास 2019 : जानें किस शिवलिंग की पूजा से मिलता है कौन सा वरदान

Sat, 20 Jul 2019 03:01 PM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
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श्रावण मास में शिवलिंग की पूजा
श्रावण के महीने में भगवान शिव की साधना-आराधना का विशेष महत्व है। श्रावण मास में शिवलिंग को गंगा जल से अभिषेक करने से जीवन के सभी कष्ट दूर और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शास्त्रों का कथन है कि 'शिवः अभिषेक प्रियः' अर्थात् कल्याणकारी शिव को अभिषेक अत्यंत प्रिय है। समस्त मनोरथों को पूर्ण करने की शक्ति शिवलिंग के अभिषेक में समाहित है। ब्रह्म का विग्रह रूप ही शिव हैं। ''रुतम्-दुःखम् द्रावयति-नाशयतीति रुद्रः' यानि भगवान शिव सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं।

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श्रावण मास में लोग अलग-अलग कामनाओं के लिए अलग-अलग शिवलिंग पर अलग-अलग तरीके से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक रामबाण माना जाता है। आइए सबसे पहले जानते हैं कि आखिर क्या है रुद्राभिषेक? भगवान शिव का एक नाम रुद्र भी है। भगवान शिव के इसी स्वरूप को ध्यान में रखते हुए उनका अभिषेक ही रुद्राभिषेक है। वैसे तो पूरे साल में आप कभी भी भगवान शिव की कृपा पाने के लिए शिवलिंग का रुद्राभिषेक कर भोलेनाथ से मनचाहा वरदान पा सकते हैं, लेकिन श्रावण मास में इसका महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। 

भगवान शिव के रुद्राभिषेक में शिवलिंग पर पवित्र गंगा जल अर्पण करने के पश्चात् विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इस पूजा का सार यजुर्वेद से श्री रुद्रम के पवित्र मंत्र का जाप और शिवलिंग को कई सामग्रियों से पवित्र स्नान देना है। भगवान शिव की यह विशेष पूजा सनातन परंपरा की सबसे शक्तिशाली पूजा में से एक है। इस पूजा से शिव के भक्त को अभय का वरदान प्राप्त होता है। मान्यता है कि शिव को अत्यंत प्रिय रुद्राभिषेक से उसके न सिर्फ इस जन्म के बल्कि पूर्व जन्म के पाप भी दूर हो जाते हैं। 
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श्रावण मास में शिवलिंग की पूजा
जानें किस अभिषेक से पूरी होती है कौन सी कामना

शिव को अत्यंत उदार भगवान माना जाता है और यह आसानी से प्रसन्न हो जाते हैं। श्रावण मास में शिवलिंग पर पवित्र गंगा जल से अभिषेक करने से सुख-सौभाग्य में वृद्धि होती है। वहीं भगवान शिव का दूध से अभिषेक करने पर उत्तम संतान की प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त होता है। गन्ने के रस से अभिषेक करने पर भगवान शिव अपने साधक को यश में बढ़ोत्तरी का आशीर्वाद देते हैं। इसी तरह यदि आप कर्ज के मर्ज से परेशान हैं तो आपको भगवान शिव का शहद से रुद्राभिषेक करना चाहिए। शिवलिंग पर कुश के जल से रुद्राभिषेक करने पर रोग मुक्ति मिलती है तो वहीं पंचामृत के रुद्राभिषेक से  अष्टलक्ष्मी व तीर्थों के जल से मोक्ष की प्राप्ति होती है। 

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श्रावण मास में शिवलिंग की पूजा
मनोकामना के अनुसार चुनें शिवलिंग

श्रावण मास में न सिर्फ विभिन्न प्रकार के अभिषेक से भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है बल्कि तमाम तरह शिवलिंगों की पूजा भी साधक को अलग-अलग प्रकार की मनोकामनाओं को पूरा करते हुए सुख-सौभाग्य एवं सिद्धि प्रदान करती है। जीवन से जुड़ी अलग-अलग मनोकामनाओं के लिए अलग-अलग शिवलिंग और अलग-अलग तरीके से शिवलिंग के अभिषेक का विधान है। जैसे रत्नों द्वारा निर्मित लिंग की पूजा लक्ष्मी की कृपा दिलाने वाला होता है, वहीं पत्थरों से बना लिंग सभी प्रकार की सिद्धियों को प्रदान करने वाला होता है। इसी प्रकार धातु से बना शिवलिंग धन-संपत्ति देने वाला, लकड़ी से बना शिवलिंग भोग-सिद्धि प्रदान करने वाला, शुद्ध मिट्टी से बना हुआ (पार्थिव) शिवलिंग सभी सिद्धियों की प्राप्ति कराने वाला, पारद से बना शिवलिंग सभी प्रकार के दैहिक, दैविक एवं भौतिक दु:खों को दूर करने वाला होता है। शिवलिंग का अभिषेक  करने से व्यक्ति के ग्रह-गोचर अनुकूल होने लगते हैं। घर से नकारात्मक ऊर्जा हमेशा के लिए दूर चली जाती है।

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श्रावण मास में भोले बाबा को मनाने के लिए तमाम शिवलिंगों में से पारद और पार्थिव शिवलिंग का अत्यधिक महत्व है। आइए इन दोनों शिवलिंग की महिमा के बारे में विस्तार से जानते हैं — 

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श्रावण मास में शिवलिंग की पूजा
पारद शिवलिंग से पूरी होंगी सभी मनोकामनाएं

भगवान शंकर को पारा अतिप्रिय है तथा रसराज पारद शिव का शक्ति रुपी विग्रह होने के कारण ही समस्त असुर तथा देवी-देवताओं के लिए वंदनीय है। शास्त्रों के अनुसार रावण रससिद्ध योगी था। पारद शिवलिंग की पूजा से शिव को प्रसन्न कर अनेक दिव्य शक्तियों को प्राप्त किया। शिव महापुराण में शिवजी का कथन है कि करोड़ों शिवलिंगों के पूजन से जो फल प्राप्त होता है, उससे भी करोड़ गुना अधिक फल पारद शिवलिंग की पूजा और उसके दर्शन मात्र से ही प्राप्त हो जाता है। 

पारद शब्द में प-विष्णु, अ-अकार, र-शिव और द-ब्रह्मा का प्रतीक है। पारद शिवलिंग की पूजा को शास्त्रों में सर्वश्रेष्ठ बताया गया है। इस समूचे ब्रह्माण्ड में सर्वोत्तम दिव्य वस्तु के रूप में पूजित रससिद्ध पारद शिवलिंग समस्त दैहिक, दैविक एवं भौतिक महादु:खों से मुक्ति दिलाने वाला है। पारद शंभुबीज है। कहने का तात्पर्य यह कि पारद की उत्पत्ति महादेव के शरीर से उत्पन्न पदार्थ शुक्र से मानी गई है। इसलिए शास्त्रों में पारद को साक्षात शिव का रूप माना गया है और पारद लिंग का सबसे ज़्यादा महत्त्व बताकर उसे दिव्य बताया गया है। 

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श्रावण मास में शिवलिंग की पूजा
पार्थिव शिवलिंग की पूजा से मां पार्वती को मिले थे महादेव 

पार्थिव शिवलिंगों के पूजन का श्रावण में अपार महात्म्य है। पारद शिवलिंग की तरह पार्थिव शिवलिंग पूजा से भी पुण्य सृजित होते हैं। पार्थिव शिवलिंग की पूजा करने से भगवान शिव मनुष्य पर कृपा बरसाते हैं। मां पार्वती ने शिवजी को प्राप्त करने के लिए कोटि शिवलिंग निर्मित कर उनका अभिषेक विसर्जित किया तो भगवान शंकर की प्राप्ति हुई। मान्यता है कि पार्थिव शिवलिंग की पूजा सभी तरह के लौकिक तथा परलौकिक सुख देने वाली है।

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