श्रावण के महीने में भगवान शिव की साधना-आराधना का विशेष महत्व है। श्रावण मास में शिवलिंग को गंगा जल से अभिषेक करने से जीवन के सभी कष्ट दूर और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। शास्त्रों का कथन है कि 'शिवः अभिषेक प्रियः' अर्थात् कल्याणकारी शिव को अभिषेक अत्यंत प्रिय है। समस्त मनोरथों को पूर्ण करने की शक्ति शिवलिंग के अभिषेक में समाहित है। ब्रह्म का विग्रह रूप ही शिव हैं। ''रुतम्-दुःखम् द्रावयति-नाशयतीति रुद्रः' यानि भगवान शिव सभी दु:खों को नष्ट कर देते हैं।
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श्रावण मास में लोग अलग-अलग कामनाओं के लिए अलग-अलग शिवलिंग पर अलग-अलग तरीके से भगवान शिव का रुद्राभिषेक करते हैं। भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रुद्राभिषेक रामबाण माना जाता है। आइए सबसे पहले जानते हैं कि आखिर क्या है रुद्राभिषेक? भगवान शिव का एक नाम रुद्र भी है। भगवान शिव के इसी स्वरूप को ध्यान में रखते हुए उनका अभिषेक ही रुद्राभिषेक है। वैसे तो पूरे साल में आप कभी भी भगवान शिव की कृपा पाने के लिए शिवलिंग का रुद्राभिषेक कर भोलेनाथ से मनचाहा वरदान पा सकते हैं, लेकिन श्रावण मास में इसका महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है।
भगवान शिव के रुद्राभिषेक में शिवलिंग पर पवित्र गंगा जल अर्पण करने के पश्चात् विधि-विधान से उनकी पूजा-अर्चना की जाती है। इस पूजा का सार यजुर्वेद से श्री रुद्रम के पवित्र मंत्र का जाप और शिवलिंग को कई सामग्रियों से पवित्र स्नान देना है। भगवान शिव की यह विशेष पूजा सनातन परंपरा की सबसे शक्तिशाली पूजा में से एक है। इस पूजा से शिव के भक्त को अभय का वरदान प्राप्त होता है। मान्यता है कि शिव को अत्यंत प्रिय रुद्राभिषेक से उसके न सिर्फ इस जन्म के बल्कि पूर्व जन्म के पाप भी दूर हो जाते हैं।