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Varuthini Ekadashi : जानें सुख और सौभाग्य दिलाने वाली वरुथिनी एकादशी व्रत का महत्व एवं पूजन विधि

Tue, 30 Apr 2019 08:06 AM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Varuthini Ekadashi 2019
सनातन परंपरा में पावन एकादशी तिथि का काफी महत्व है। भगवान विष्णु की साधना-आराधना कर उनकी कृपा पाने के लिए साधक एकादशी का व्रत रखते हैं। एक साल में कुल 24 एकादशियां होती हैं। हालांकि जब अधिकमास या मलमास आता है, तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है। 

मोक्ष दिलाने वाली पावन तिथि
वैशाख मास के कृष्ण पक्ष को पड़ने वाली यह पावन एकादशी जिसे वरुथिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है, इस साल 30 अप्रैल को पड़ेगी। इस एकादशी के व्रत के विषय में मान्यता है कि जो व्यक्ति इस व्रत का विधि-विधान से पालन करता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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Varuthini Ekadashi 2019
भगवान मधुसूदन की पूजा का विधान

वरुथिनी एकादशी के व्रत में भगवान मधुसूदन की पूजा का विधान है। पुराणों में इस एकादशी को अत्यंत पुण्यदायिनी और सौभाग्य प्रदायिनी प्रदान करने वाली कहा गया है। पुराणों में इस व्रत की ऐसी महिमा बतायी गयी है कि जो भी यह व्रत रखकर भगवान मधुसूदन की पूजा करता है, उसके सारे पाप और ताप दूर हो जाते हैं। व्रत के पुण्य से व्यक्ति को स्वर्ग अथवा अन्य उत्तम लोक में स्थान प्राप्त होता है।
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Varuthini Ekadashi 2019
वरुथिनी एकादशी का महात्मय

तिथियों में श्रेष्ठ मानी जाने वाली एकादशी के बारे में कहा गया है कि जो फल ब्राह्मणों को सोना दान देने, करोड़ों वर्ष तक तपस्या करने तथा कन्यादान करने पर मिलता है, वह मात्र इस पावन वरूथिनी एकादशी के व्रत करने से प्राप्त हो जाता है।

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Varuthini Ekadashi 2019
वरुथिनी एकादशी व्रत की पूजन विधि

वरुथिनी एकादशी के दिन प्रात:काल स्नान-ध्यान के पश्चात् स्वच्छ वस्त्र धारण करके विधि-विधान पूर्व कलश की स्थापना करें। जिसमें श्रीफल अर्थात् नारियल, आम के पत्ते, लाल रंग की चुनरी या कलाई नारा बांधें। इसके पश्चात् कलश देवता एवं भगवान मधुसूदन की धूप-दीप जला कर पूजा करें। भगवान को मिष्ठान, ऋतुफल यानी खरबूजा, आम आदि चढ़ाकर श्रीहरि का भजन कीर्तन एवं मंत्र का मनन करें। वरुथिनी एकादशी में व्रती को फलाहार का विधान है। 
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Varuthini Ekadashi 2019
वरुथिनी एकादशी व्रत का नियम

वरुथिनी एकादशी व्रत रखने वाले साधक को तमाम तरह के नियम-संयम का पालन करना पड़ता है। व्रत वाले दिन साधक को काम, क्रोध आदि पर पूर्ण नियंत्रण रखना होता है। साथ ही उसे झूठ बोलने और निंदा करने से बचना होता है। वरुथिनी एकादशी का व्रत करने वाले के लिए पान, सुपारी एवं तैलीय पदार्थ का सेवन करना पूर्णत: वर्जित है। व्रती को इस दिन निद्रा का त्याग करके भगवान मधुसूदन का जागरण, भजन, कीर्तन एवं मंत्र जप करना चाहिए। व्रती को इस दिन भगवान के नाम और उनके अवतारों की कथा और कीर्तन करना चाहिए। द्वादशी के दिन भी लहसुन, प्याज, बैंगन, मांसाहार और मादक पदार्थों से परहेज रखना चाहिए।
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