मां दुर्गा का छठा स्वरुप हैं देवी कात्यायनी। नवरात्रि के छठे दिन मां दुर्गा के इसी स्वरूप को पूजा जाता है। इनकी उपासना और आराधना से भक्तों को बड़ी आसानी से अर्थ, धर्म, कर्म और मोक्ष चारों फलों की प्राप्ति होती है। मां दुर्गा के इस स्वरूप की प्राचीन कथा इस प्रकार है कि एक प्रसिद्ध महर्षि जिनका नाम कात्यायन था, ने भगवती जगदम्बा को पुत्री के रूप में पाने के लिए उनकी कठिन तपस्या की। कई हजार वर्ष कठिन तपस्या के पश्चात् महर्षि कात्यायन के यहां देवी जगदम्बा ने पुत्री रूप में जन्म लिया और कात्यायनी कहलायीं। ये बहुत ही गुणवंती थीं। इनका प्रमुख गुण खोज करना था। इसीलिए वैज्ञानिक युग में देवी कात्यायनी का सर्वाधिक महत्व है। मां कात्यायनी अमोघ फलदायिनी हैं। इस दिन साधक का मन आज्ञा चक्र में स्थित रहता है। योग साधना में इस आज्ञा चक्र का अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। इस दिन जातक का मन आज्ञा चक्र में स्थित होने के कारण मां कात्यायनी के सहज रूप से दर्शन प्राप्त होते हैं। साधक इस लोक में रहते हुए अलौकिक तेज से युक्त रहता है।
जो अविवाहित हैं या जिनके विवाह में कोई परेशानी आ रही है, उनके द्वारा विधि पूर्वक की गयी मां कात्यायनी की पूजा सर्वश्रेष्ठ फल प्रदान करती है। इनका स्वरूप अत्यंत भव्य और दिव्य है। ये स्वर्ण के समान चमकीली हैं। इनकी चार भुजाएं हैं। दाईं तरफ का ऊपर वाला हाथ अभयमुद्रा में है तथा नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में। मां के बाईं तरफ के ऊपर वाले हाथ में तलवार है व नीचे वाले हाथ में कमल का फूल सुशोभित है। इनका वाहन भी सिंह है।
मां कात्यायनी का ज्योतिष से सम्बन्ध
जिन जातकों की कुंडली में विवाह से सम्बंधित कोई परेशानी है तो मां कात्यायनी की साधना से वह दूर हो जाती है। स्त्री की कुंडली में विवाह का सम्बन्ध गुरु से है और पुरुष की कुंडली में स्त्री/पत्नी का संबंध शुक्र से है अर्थात् यदि जातक के जीवन में विवाह संबंधी कुछ भी परेशानी आ रही है तो मां कात्यायनी की विधि पूर्वक स्तुति करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।
आज इस उपाय को करने से मिलेगा विशिष्ट लाभ
इस दिन भगवान हारण्य जो कि एक मणि में विराजित रहते हैं, की स्थापना की जाती है और उनकी पैंतालीस दिन लगातार पूजा की जाती है। यह उपाय कठिन से कठिन विवाह भंग दोषों को समाप्त करने की क्षमता रखता है।
मां कात्यायनी पूजाविधि
सर्वप्रथम शुद्ध होकर लाल रंग के वस्त्र धारण कर चौकी पर मां कात्यायनी की प्रतिमा स्थापित करें। तत्पश्चात कलश आदि पूजन करने के बाद। पीले फूलों के साथ माता का भी पूजन करें। पूजनोपरांत मां के वंदना श्लोक का उच्चारण करें। उच्चारण के पश्चात् मां का स्त्रोत पाठ करें और फिर मां को पीले नैवेद्य का भोग लगाएं। जिन साधकों को विवाह से सम्बंधित समस्या है, इस दिन मां को हल्दी की गांठे माता को अर्पित करने से मां उन्हें उत्तम फल प्रदान करतीं हैं।
वंदना मंत्र
कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः।।
मां कात्यायनी स्त्रोत पाठ
कंचनाभा वराभयं पद्मधरा मुकटोज्जवलां।
स्मेरमुखीं शिवपत्नी कात्यायनेसुते नमोअस्तुते॥
पटाम्बर परिधानां नानालंकार भूषितां।
सिंहस्थितां पदमहस्तां कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥
परमांवदमयी देवि परब्रह्म परमात्मा।
परमशक्ति, परमभक्ति,कात्यायनसुते नमोअस्तुते॥