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Gayatri Jayanti 2019 : जानें जीवन के लिए क्यों जरूरी है वेदमाता गायत्री का आशीर्वाद

Thu, 13 Jun 2019 12:11 PM IST
Madhukar Mishra डॉ. प्रणव पण्ड्या
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Gayatri Jayanti 2019 - फोटो : Rohit Jha
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आज का दिन विशेष एवं विशिष्ट है, क्योंकि आज अमूर्त ज्ञान मूर्त हुआ, पवित्रता अभिव्यक्त हुई। गायत्री के रूप में दूरदर्शी विवेकशीलता, प्रखरता व पवित्रता धरती पर प्रकट हुई। अवतरण की इस महा घटना से मानवीय चेतना के अनछुए पक्ष सजग-सक्रिय हुए, एक नई संभावनाओं का पथ खुला। आज के दिन इतिहास के पन्नों में कई महत्त्वपूर्ण पौराणिक, धार्मिक एवं आध्यात्मिक प्रसंग जुड़े।

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Gayatri Jayanti 2019 - फोटो : Rohit Jha
संकल्प लेकर करें मां गायत्री की साधना'

आज के दिन का संकल्प हो कि गायत्री अर्थात् सद्बुद्धि हमारे विचारों और भावनाओं में अवतरित हो, जीवन विवेकशीलता, विचारशीलता और उच्चकोटि के आदर्शों से समन्वित हो। इसी समुच्चय-समन्वय का नाम ऋतंभरा है। इस विश्व-वसुधा में ऋतंभरा प्रज्ञा का अवतरण उसी तरीके से हुआ, जिस तरीके से इस संसार में गंगा भगीरथ के द्वारा लाई गयी। 

Gayatri Jayanti 2019 - फोटो : Rohit Jha
ऐसे मिलेगा नर से नारायण बनने का आशीर्वाद

यह आध्यात्मिक धारा जब मनुष्यों में प्रवाहित होने लगी, तो इसे गायत्री विद्या, ब्रह्मविद्या कहा गया। यह शक्ति मनुष्य की तमाम सुषुप्त शक्तियों को उभारने व विकसित करने वाली है। यह मनुष्यों को सिद्धियों एवं विभूतियों से भर देती है। यह मनुष्य के सच्चे स्वरूप को दिखाती है और कहती है कि तुम भटके हुए देवता हो, भटकन से उबरकर देवमानव बन सकते हो, नर से नारायण बन सकते हो।

Gayatri Jayanti 2019 - फोटो : Rohit Jha
न करें यह भूल 

मनुष्य अपने जीवन की बहुमूल्य शक्ति व साधनों को, शारीरिक सौन्दर्य को निखारने और पेट भरने के लिए दो रोटी के स्थान पर तमाम तरह के अभक्ष्य-भक्षण करने हेतु खपा देता है। इसके लए वह अपने सभी नैतिक मूल्यों और सिद्धान्तों को ताक पर रख देता है। वह अपनी अक्ल और भावना को उस पर बलिदान करता रहता है। मनुष्य स्वयं को शरीर मानकर चलने लगा और सभी उच्चादर्शों को रौंदता चला गया तथ यह उम्मीद लगाता रहा कि उसे दुनिया की सभी वैभव-विभूतियां, सुख-साधन की सभी चीजें हस्तगत हो जाएं। 

मनुष्य को सारी की सारी इन्द्रियाँ इसलिए मिली थीं कि मनुष्य आनन्दित होकर जिए, पर उस अभागेपन की क्या कहें, जिसे उपयोग करना नहीं आया और इन इन्द्रियों के भीतर जो प्रखरता, दिव्यता और सौन्दर्य था, उसे भी गंवा दिया, सभी श्रेष्ठ उद्देश्यों को धूलिधूसरित कर दिया और ठीक उल्टी दिशा में चल पड़ा।

Gayatri Jayanti 2019
मां गायत्री का महाज्ञान
त्रिपदा गायत्री की तीन धाराएं इन तीनों चीजों से उबरने की शिक्षा देती हैं। मनुष्य को औरों के लिए, जीवन में उत्कृष्टता संवर्धन हेतु प्रभु समर्पित जीवन जीना चाहिए। गायत्री महामंत्र का दूसरा शिक्षण यह है कि मनुष्य के पास शरीर और मन की जो शक्तियां हैं, उन्हें वासना के द्वारा नष्ट नहीं करना चाहिए। अपने आपको समेटना चाहिए, बिखरेना नहीं। इन्द्रियों की सामर्थ्य व शक्तियों का अपव्यय नहीं, सद्व्यय करना चाहिए। अगर ऐसा हो सके, तो हमारी जीवन-ऊर्जा का क्षरण रुकेगा, वह संचित-संरक्षित होगा तथा सदुद्देश्य के लिए उसका उपयोग होगा। तीसरा शिक्षण यह है कि हम अपने लोभ-लालच को, अपनी कामना-तृष्णा को निगृहीत कर सकें, तो हममें से प्रत्येक व्यक्ति देवमानव की श्रेणी में पहुंच सकता है। 
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Gayatri Jayanti 2019
साधना ही नहीं आत्ममंथन भी करें

तीन धाराओं के रूप में त्रिपदा गायत्री, गायत्री जयंती के दिन इसीलिए अवतरित हुई थीं कि मनुष्य यश-सम्मान के पीछे न भागे, कर्त्तव्य का अनुसरण करे, संसार चाहे कितना भी विरोध करे, किन्तु  वह सदाचरण का परित्याग न करे।  आज के दिन हम और आप सबको फिर से आत्म मंथन करना चाहिए। हजार बार सोचना चाहिए कि हमारी भगवत् प्रदत्त सामर्थ्य व शक्तियों का सदुपयोग व सुनियोजन हो रहा है या नहीं? गायत्री जयंती इस संकल्प को क्रियान्वित करने का महापर्व है और इसे पूर्ण करना हमारा परम कर्त्तव्य है।

लेखक- अखिल विश्व गायत्री परिवार प्रमुख एवं देवसंस्कृति विवि कुलाधिपति हैं।
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