फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नवरात्रि 2018 : आज करें स्कंदमाता की साधना, पूरी होगी कुलदीपक की चाह

Sun, 14 Oct 2018 07:19 AM IST
-डॉ. विनय बजरंगी, ज्योतिषाचार्य व कर्म संशोधक
विज्ञापन
navratri 2018
विज्ञापन

मां दुर्गा का पंचम स्वरुप है स्कंदमाता। पंचम नवरात्रि के दिन स्कन्द माता का पूजन किया जाता है। भगवान शिव और मां पार्वती के पुत्र का नाम है स्कन्द, जिन्हें कार्तिकेय के नाम से भी जाना जाता है। भगवान स्कन्द को मां पार्वती ने स्वयं प्रशिक्षित किया था। उनके इसी रूप को स्कंदमाता कहते हैं। प्रचीन काल में एक तारकासुर नामक राक्षस था। जिसकी मृत्यु केवल शिव पुत्र से ही संभव थी। तब मां पार्वती ने अपने पुत्र भगवान स्कन्द (कार्तिकेय का दूसरा नाम) को युद्ध के लिए प्रशिक्षित करने हेतु स्कन्द माता का रूप लिया और उन्होंने भगवान स्कन्द को युद्ध के लिए प्रशिक्षित किया था। स्कंदमाता से युद्ध प्रशिक्षिण लेने के पश्चात् भगवान स्कन्द ने तारकासुर का वध किया।

विज्ञापन




भगवान स्कंद कुमार (कार्तिकेय) की माता होने के कारण दुर्गा जी के इस पांचवें स्वरूप को स्कंदमाता नाम प्राप्त हुआ है। भगवान स्कन्द बाल रूप में माता स्कन्द की गोद में विराजित हैं। माता के इस दिन साधक का मन विशुद्ध चक्र में अवस्थित होता है। स्कंद मातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजाएं हैं, ये दाहिनी ऊपरी भुजा में भगवान स्कंद को गोद में पकड़े हैं और दाहिनी निचली भुजा जो ऊपर को उठी है, उसमें कमल पुष्प पकड़ा हुआ है। मां का वर्ण पूर्णत: शुभ्र है और कमल के पुष्प पर विराजित रहती हैं। इन्हें विद्यावाहिनी दुर्गा देवी भी कहा जाता है।
विज्ञापन


स्कंदमाता का ज्योतिषीय सम्बन्ध  
मां स्कंदमाता की साधना का संबंध बुद्ध ग्रह से है। कालपुरूष सिद्धांत के अनुसार कुण्डली में बुद्ध ग्रह का संबंध तीसरे और छठे घर से होता है और छठे भाव का सम्बन्ध बीमारी से है। अत: रोग से मुक्ति के लिए विधि-विधान के अनुसार स्कंदमाता की पूजा सर्वश्रेष्ठ फल प्रदान करती है। मां दुर्गा का यह स्वरूप संतान प्राप्ति का वर देता है। आज के दिन मां दुर्गा के इस स्वरूप की विशेष रूप से पूजा करने से संतान की प्राप्ति होती है।

कुंडली जागरण के उद्देश्य से जो साधक दुर्गा मां की उपासना कर रहे हैं, उनके लिए दुर्गा पूजा का यह दिन विशुद्ध चक्र की साधना का होता है। इस चक्र का भेदन करने के लिए साधक को पहले मां की विधि सहित पूजा करनी चाहिए।

संतान प्राप्ति का अचूक उपाय
इस दिन संतान प्राप्ति के लिए गोपाल यंत्र को विधि-विधान के साथ अपने पूजा-स्थल पर स्थापित करें। तथा पांच दिन लगातार चांदी का नाग-नागिन का जोड़ा इस पर चढ़ाएं, जिन्हें छठे दिन बहते जल में प्रवाहित करें। छठे दिन शाम को ही सुन्दरकांड को पाठ विधि-विधान से करें।
विज्ञापन


स्कन्द माता पूजन विधि
सर्वपर्थम शुद्ध होकर आज के दिन हरे रंग के कपड़े पहनें। इसके बाद चौकी पर स्कन्द माता की प्रतिमा स्थापित करें। कलश आदि के पूजन के पश्चात स्कन्द माता की सौभाग्य सूत्र, चंदन, रोली, हल्दी, सिंदूर, दुर्वा, बिल्वपत्र, आभूषण, पुष्प-हार, सुगंधित द्रव्य, धूप-दीप, नैवेद्य, फल, पान, दक्षिणा, आरती, प्रदक्षिणा, मंत्र पुष्पांजलि आदि करें और वंदना श्लोक पढ़ें। वंदना श्लोक के पश्चात माता को केले का भोग लगाएं और माता स्त्रोत पाठ करें। तत्पश्चात प्रसाद वितरण कर पूजन संपन्न करें।

वंदना श्लोक
सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया।
शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी।।

स्कन्द माता का स्त्रोत पाठ
नमामि स्कन्दमाता स्कन्दधारिणीम्।
समग्रतत्वसागररमपारपार गहराम्॥
शिवाप्रभा समुज्वलां स्फुच्छशागशेखराम्।
ललाटरत्नभास्करां जगत्प्रीन्तिभास्कराम्॥
महेन्द्रकश्यपार्चिता सनंतकुमाररसस्तुताम्।
सुरासुरेन्द्रवन्दिता यथार्थनिर्मलादभुताम्॥
अतर्क्यरोचिरूविजां विकार दोषवर्जिताम्।
मुमुक्षुभिर्विचिन्तता विशेषतत्वमुचिताम्॥
नानालंकार भूषितां मृगेन्द्रवाहनाग्रजाम्।
सुशुध्दतत्वतोषणां त्रिवेन्दमारभुषताम्॥
सुधार्मिकौपकारिणी सुरेन्द्रकौरिघातिनीम्।
शुभां पुष्पमालिनी सुकर्णकल्पशाखिनीम्॥
तमोन्धकारयामिनी शिवस्वभाव कामिनीम्।
सहस्त्र्सूर्यराजिका धनज्ज्योगकारिकाम्॥
सुशुध्द काल कन्दला सुभडवृन्दमजुल्लाम्।
प्रजायिनी प्रजावति नमामि मातरं सतीम्॥
स्वकर्मकारिणी गति हरिप्रयाच पार्वतीम्।
अनन्तशक्ति कान्तिदां यशोअर्थभुक्तिमुक्तिदाम्॥
पुनःपुनर्जगद्वितां नमाम्यहं सुरार्चिताम्।
जयेश्वरि त्रिलोचने प्रसीद देवीपाहिमाम्॥

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें