अपने सौभाग्यवृद्धि एवं जीवनसाथी की दीर्घायु की कामना के लिए किया जाने वाला व्रत करवाचौथ कार्तिक कृष्णपक्ष चतुर्थी 04 नवंबर बुधवार को मनाया जाएगा। यह व्रत मध्य और पश्चिम भारत का प्रमुख पर्व है। भारतीय माताएं-बहनें इस व्रत को अपने सुहाग की रक्षा के लिए रखती हैं। भगवान गणेश की प्रिय तिथि चतुर्थी में किया जाने वाला यह व्रत स्त्रियों का सर्वाधिक लोकप्रिय व्रत है। सौभाग्यवती स्त्रियां अपने अक्षुण सुहाग, पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य एवं मंगल कामना के लिए इस दिन व्रत करती हैं।
पौराणिक मान्यता के अनुसार पति, पुत्र-पौत्र तथा सुख-सौभाग्य की वृद्धि के लिए इस दिन शिव परिवार के साथ-साथ चंद्रमा का पूजन भी करने का विधान है। क्योंकि परमेश्वर श्रीशिव के शीश पर निरंतर चंद्रमा का वास होने के कारण उन्हें भी शिव परिवार का ही सदस्य माना गया है। ऐसी मान्यता है कि अक्षय तृतीया और हरतालिका तीज की ही तरह करवा चौथ व्रत में भी अक्षुण सुख-सौभाग्य की वृद्धि करने की क्षमता है। व्रत के दिन व्रती माताएं औह बहनें रात्रि में चंद्रमा के दर्शन करके अर्ध्य देकर ही जल-भोजन आदि ग्रहण करती हैं। व्रती महिलाओं को पूजा के बाद मिट्टी या तांबे के करवे में चावल, उड़द की दाल, सुहाग-श्रृंगार की सामग्री दान करते हुए परिवार के बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना चाहिए। नारीशक्ति किसी भी जाति, वर्ण या संप्रदाय की हो सभी यह व्रत करके अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य की कामना कर सकती हैं।
भारत के प्रमुख नगरों में इस दिन चंद्रमा का उदय
दिल्ली- रात्रि 08 बजकर 12 मिनट।
मुंबई- रात्रि 08 बजकर 52 मिनट।
कोलकाता- रात्रि 07 बजकर 40 मिनट।
चेन्नई- रात्रि 08 बजकर 33 मिनट।
शिमला- रात्रि 08 बजकर 06 मिनट।
चंड़ीगढ़- रात्रि 08 बजकर 09 मिनट।
अमृतसर- रात्रि 08 बजकर 15 मिनट।
श्रीनगर- रात्रि 08 बजकर 08 मिनट।
पटना- रात्रि 07 बजकर 47 मिनट।
प्रयाग- रात्रि 08 बजकर 02मिनट।
देहरादून- रात्रि 08 बजकर 05 मिनट।
अहमदाबाद- रात्रि 08 बजकर 45 मिनट।
सावधानी एवं विधान
करवा चौथ जैसा पवित्रव्रत को उन महिलाओं के लिए अधिक शुभफलदायक रहता है, जो अपने घर-परिवार में सास-ससुर एवं बड़ों का आदर- सम्मान करती हों, जिनके अच्छे कर्मों द्वारा परिवार के वरिष्ठ-बुजुर्ग उन्हें सुख-सौभाग्य वृद्धिकारक आशीर्वाद देने के लिए तत्पर रहें। परिवार को तोड़ने वाली, पति का तिरस्कार करने वाली, अति झगड़ालू महिलाएं अथवा माता-पिता का तिरस्कार करने वाली महिलाओं को यह व्रत करने से बचना चाहिए अन्यथा शिव परिवार का गुस्सा भी झेलना पड़ सकता है। इस दिन शायंकाल भगवान शिव-पार्वती, स्वामी कार्तिकेय, गणेश एवं चंद्रमा का यथा उपलब्ध सामग्री से षोडशोपचार विधि से पूजन करें। भगवान गणेश जी के लिए लड्डू का नैवेद्य अर्पित करें।
रात्रि के समय चंद्रमा का दर्शन करके यह मंत्र पढ़ते हुई अर्घ्य दें मंत्र है-'सौम्यरूप महाभाग मंत्रराज द्विजोत्तम। मम पूर्वकृतं पापं औषधीश क्षमस्व में।। अर्थात- हे ! मन को शीतलता पहुंचाने वाले, सौम्य स्वभाव वाले ब्राह्मणों में श्रेष्ठ, सभी मंत्रों एवं औषधियों के स्वामी चंद्रदेव मेरे द्वारा पूर्व के जन्मों में किये गये पाप को क्षमा करें और मेरी पूजा स्वीकार करते हुए मुझे और मेरे परिवार को आरोग्य तथा दीर्घायु का आशीर्वाद दें। पूजा संपन्न होने के बाद माता-पिता एवं पति का भी आशीर्वाद लें। सास मां को भी एक पंचपात्र वस्त्र और विशेष करवा भेंट करके आशीर्वाद लें। यदि वे जीवित न हों तो उनके तुल्य किसी अन्य स्त्री को भेंट करें और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भोजन करें।